Middle East News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘सभ्यता मिटाने’ की दी गई सीधी धमकी के बाद ईरान ने अपनी रक्षा के लिए दुनिया की सबसे विवादित और खौफनाक रणनीति अपना ली है। तेहरान ने अपने प्रमुख पुलों, बांधों और पावर स्टेशनों के पास हजारों नागरिकों को ‘ह्यूमन शील्ड’ (मानवीय ढाल) के रूप में तैनात कर दिया है। ट्रंप का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले ईरान का यह कदम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
पावर स्टेशनों पर उमड़ा हजारों लोगों का हुजूम
ईरान के रणनीतिक ठिकानों से आ रही तस्वीरें पूरी दुनिया को चौंका रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, देश के महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों और प्रमुख पुलों पर बड़ी संख्या में आम लोग इकट्ठा हो गए हैं। ये लोग वहां चौबीसों घंटे पहरा दे रहे हैं ताकि अमेरिका इन जगहों पर हवाई हमला न कर सके। ईरानी प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की मौजूदगी के कारण अमेरिका और इजरायल इन बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने से पहले सौ बार सोचेंगे।
ट्रंप की ‘पूरी सभ्यता’ खत्म करने वाली सबसे बड़ी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि तय समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ, तो ईरान की पूरी सभ्यता को एक ही रात में नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना ईरान के पावर ग्रिड और महत्वपूर्ण ब्रिजों को तबाह करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के इस सख्त लहजे ने तेहरान में भारी दहशत पैदा कर दी है, जिसके जवाब में अब नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
बसे-बसाए शहरों पर मंडराया अंधेरे का गहरा साया
ईरान का दावा है कि यदि अमेरिका ने उसके पावर प्लांट्स पर हमला किया, तो केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरा खाड़ी क्षेत्र और पड़ोसी सऊदी अरब भी गहरे अंधेरे में डूब जाएगा। इस रणनीतिक बढ़त को बनाए रखने के लिए ही ईरान ने अपने ऊर्जा केंद्रों के बाहर आम लोगों को बिठा दिया है। स्थानीय लोगों में युद्ध को लेकर भारी आक्रोश और डर का माहौल है। वे अपने देश की संपत्तियों को बचाने के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार दिख रहे हैं।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय नियमों की भारी अनदेखी
युद्ध की स्थिति में नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और जिनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन माना जाता है। मानवाधिकार संगठनों ने ईरान के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रंप अपने अल्टीमेटम पर कायम रहे और हमला हुआ, तो हजारों बेगुनाह लोगों की जान जा सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की सांसें मंगलवार रात की उस डेडलाइन पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि एशिया का यह हिस्सा राख होगा या बचेगा।

