Himachal Pradesh News: देश के बड़े फार्मा हब हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने मई 2026 का नया ड्रग अलर्ट जारी किया है। इस जांच सूची में प्रदेश की 44 दवाएं और मेडिकल उत्पाद गुणवत्ता टेस्ट में पूरी तरह फेल साबित हुए हैं।
बड़ी बीमारियों की जरूरी दवाएं भी गुणवत्ता टेस्ट में फेल
इस गुणवत्ता जांच में फेल होने वाली दवाओं में उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, डायबिटीज और संक्रमण के इलाज की जरूरी दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा दर्द, सूजन और गैस्ट्रिक के इलाज में रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। विभाग ने चार सिरप और एक एंटीबायोटिक दवा को नकली घोषित कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश भर में कुल 157 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 44 उत्पाद अकेले हिमाचल प्रदेश की अलग-अलग कंपनियों में बने थे। यह सभी सब-स्टैंडर्ड उत्पाद बद्दी, नालागढ़, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के दवा कारखानों में तैयार किए गए थे।
लाखों मरीजों की सेहत से जुड़े रोजमर्रा के उत्पाद शामिल
जांच रिपोर्ट में शामिल कई दवाएं ऐसी हैं जिन्हें देश के लाखों मरीज डॉक्टर की सलाह पर नियमित खाते हैं। इनमें खून साफ करने वाले इंजेक्शन, विटामिन सप्लीमेंट और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली गोलियां शामिल हैं। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस संवेदनशील मामले में केवल संबंधित बैच खराब पाए गए हैं, न कि पूरा ब्रांड।
राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने इस गंभीर मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि नियम तोड़ने वाले सभी उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। बाजार से इन प्रभावित बैचों को वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विभाग दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रहा है।

