Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस मीटिंग को लेकर काफी सरगर्मी है। दरअसल, एक दिन पहले ही देश की सियासत में दो बड़ी घटनाएं देखने को मिली थीं, जिससे कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने पद छोड़ा है। भाजपा ने उन्हें दोबारा उच्च सदन नहीं भेजा था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन राज्य मंत्री का यह इस्तीफा तुरंत मंजूर भी कर लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में जल्द बड़े फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस नए बदलाव में विपक्षी खेमे से आए कई वरिष्ठ सांसदों को मौका दिया जा सकता है।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त हो गया है। हालांकि, बिट्टू ने अभी तक मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वे तय नियमों के मुताबिक अगले छह महीने तक पद पर बने रह सकते हैं। बिट्टू ने पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं।
‘एक व्यक्ति-एक पद’ फॉर्मूले से खाली होंगे कई अहम मंत्रालय
भारतीय जनता पार्टी के ‘वन मैन, वन पोस्ट’ वाले संगठनात्मक नियम के कारण भी यह फेरबदल तय माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस दोहरी जिम्मेदारी के कारण उन्हें जल्द ही अपना इस्तीफा सौंपना पड़ सकता है।
इसी तरह केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को भी उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई है। पार्टी की नई रणनीति के तहत दोनों दिग्गज नेताओं को जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी मिल सकती है। इसके बाद नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
दो-तिहाई बहुमत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की बड़ी तैयारी
इस संभावित फेरबदल के पीछे तीन बड़े राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी, टीएमसी और उद्धव गुट के कई सांसदों ने एनडीए को अपना समर्थन दिया है। भाजपा इन नए सहयोगी दलों के सांसदों को सरकार या संगठन में बड़ी भूमिका देकर पुरस्कृत कर सकती है।
इसके अलावा, केंद्र सरकार भविष्य के कुछ महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत का मजबूत गणित भी तैयार करना चाहती है। साथ ही, अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी पूरी तरह साधा जाएगा।

