Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर मिड-डे मील वर्कर अब पूरी तरह उग्र हो चुके हैं। कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से अपनी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है। सीटू से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कुल्लू के ढालपुर मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपा।
हरियाणा की तर्ज पर वेतन और हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग
यूनियन की नेता जुग देई ने मांग रखी है कि प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील वर्कर्स को हरियाणा सरकार की तर्ज पर बेहतर वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 10 महीने के बजाय पूरे 12 महीने का वेतन तुरंत जारी करने की पुरजोर वकालत की है।
इसके अलावा यूनियन ने मांग की है कि स्कूलों में नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को तुरंत हटाया जाए। संगठन के मुताबिक राज्य के प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से कम से कम दो वर्कर्स की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे काम का बोझ कम होगा और व्यवस्था में भी काफी सुधार देखने को मिलेगा।
अतिरिक्त कार्य का मिले भुगतान और बंद स्कूलों के स्टाफ का हो ट्रांसफर
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य जीवन सिंह ने कहा कि वर्कर्स को एक्स्ट्रा काम के लिए अतिरिक्त वेतन दिया जाए। उन्होंने आंगनबाड़ी कर्मचारियों की तरह छुट्टियां देने और 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के तहत कर्मियों को नियमित करने की मांग उठाई। बंद या मर्ज हो रहे स्कूलों के स्टाफ को दूसरे स्कूलों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।
यूनियन ने चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने के काम का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव ड्यूटी करवाई जाती है, तो अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह उन्हें भी उचित भुगतान मिले। इसके साथ ही प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की 21 अगस्त 2023 की अधिसूचना को पूरी तरह लागू किया जाए।

