मोहम्मद रफी का वह आखिरी गाना जो उनकी मौत की भविष्यवाणी की तरह आज भी भावुक कर देता है

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Mumbai News: भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की आवाज का जादू दशकों तक कायम रहा। उनकी मौत से जुड़ा एक ऐसा रहस्यमयी किस्सा है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है। कहा जाता है कि निधन से ठीक एक दिन पहले उन्होंने अपना आखिरी गाना रिकॉर्ड किया था, मानो उन्हें अपनी विदाई का आभास हो गया हो।

रिकॉर्डिंग स्टूडियो में रफी का अचानक वापस लौटना

यह घटना 30 जुलाई 1980 की है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत निर्देशन में फिल्म ‘आस पास’ के गाने रिकॉर्ड हो रहे थे। फिल्म के लिए एक गाना रिकॉर्ड हो चुका था और दूसरा अधूरा था, जिसे अगले दिन पूरा किया जाना था। मोहम्मद रफी स्टूडियो से निकलकर अपनी कार में बैठ भी चुके थे, लेकिन वे अचानक वापस लौट आए।

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स्टूडियो वापस आकर उन्होंने संगीत निर्देशकों से कहा कि वे उस अधूरे गाने की बची हुई चार लाइनें आज ही रिकॉर्ड करना चाहते हैं। यह बात सभी को हैरान कर गई, लेकिन उनकी इच्छा के आगे सब मान गए। उन्होंने बड़ी तन्मयता के साथ वे पंक्तियाँ गाईं और देर रात अपने घर के लिए रवाना हुए।

गाना जो उनकी अंतिम विदाई बन गया

रफी साहब ने फिल्म ‘आस पास’ का जो गाना रिकॉर्ड किया था, उसके बोल थे ‘तू कहीं आस पास है दोस्त’। कुछ ही घंटों बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 31 जुलाई 1980 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह गाना उनकी अंतिम रिकॉर्डिंग बन गया, जिसके शब्द आज भी सुनने वालों की आंखें नम कर देते हैं।

मोहम्मद रफी के उस आखिरी गाने की पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार थीं: ‘तेरे आने की आस है दोस्त, शाम फिर क्यों उदास है दोस्त, महकी महकी फिजा ये कहती है, तू कहीं आस पास है दोस्त’। इन बोलों में एक दर्द और गहराई है, जो उनकी विदाई के साथ हमेशा के लिए अमर हो गई। रफी साहब का जाना संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति था।

उनकी मौत वाले दिन 31 जुलाई को वे सीने में दर्द से पीड़ित थे। बताया जाता है कि उन्होंने उस दिन भजन की रिहर्सल भी की थी, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, परंतु रात तक महान गायक ने अंतिम सांस ली। उनका स्वर आज भी करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में जीवंत है।

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