सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका, निपुण संकल्प कार्यशाला से चमकेगा बच्चों का भविष्य

Uttar Pradesh News: परिषदीय स्कूलों में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार जल्द ही सभी विकासखंडों में निपुण संकल्प कार्यशाला आयोजित करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को गति देना और आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को समय सीमा में हासिल करना है।

कक्षा शिक्षण सुधार के लिए बनेगी नई रूपरेखा

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में पूरी शिक्षा व्यवस्था के समग्र सुधार की एक ठोस रूपरेखा तैयार की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारी क्लासरूम टीचिंग की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नवीन शिक्षण विधियों पर चर्चा करेंगे। वे गतिविधि आधारित शिक्षा तथा विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने वाले नए उपायों पर विशेष विचार-विमर्श करेंगे।

इस मास्टर प्लान का मुख्य फोकस सीखने में पिछड़ रहे कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ना है। इस कार्यशाला में विकासखंड स्तर के शिक्षा अधिकारियों, एआरपी, संकुल शिक्षकों तथा स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। सभी अधिकारी मिलकर शैक्षिक कैलेंडर के शत-प्रतिशत अनुपालन को सुनिश्चित करने की मजबूत रणनीति बनाएंगे।

डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए एनबीएमसी पोर्टल का उपयोग

निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी शिक्षण गतिविधियां पूरी करने के लिए एनबीएमसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर विशेष सत्र होगा। इसमें शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों, डिजिटल रिपोर्टों और दैनिक प्रगति की निगरानी संबंधी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी।

इस डिजिटल सिस्टम से स्कूल स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति की समीक्षा अधिक पारदर्शी और सटीक हो सकेगी। इसके अलावा शिक्षण संकुल बैठकों को अधिक उपयोगी और परिणामकारी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा होगी। इससे छात्र-केंद्रित गतिविधियों और मूल्यांकन आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

शिक्षकों के अनुभव और नवाचार का होगा आदान-प्रदान

संकल्प कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों के बीच व्यक्तिगत अनुभवों और नए नवाचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की रणनीति है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित संवाद और साझा सीखने की प्रक्रिया से शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। इससे सहयोगात्मक पर्यवेक्षण भी बहुत मजबूत होगा।

इस नए बदलाव से शिक्षक अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकेंगे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। कमजोर अधिगम स्तर वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विभाग जल्द ही राज्य के सभी ब्लॉकों में चरणबद्ध तरीके से यह कार्यशाला आयोजित कराएगा।

Author: Ajay Mishra

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories