यूपी में पल-पल बदलते मौसम ने मचाया हाहाकार, अस्पतालों में उमड़ी मरीजों की भारी भीड़, जानें कैसे करें खुद का बचाव।

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में पल-पल बदलते मौसम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तपती धूप और अचानक हो रही बारिश के कारण लोग तेजी से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

करबला निवासी विजय कुमार को पिछले तीन दिनों से तेज बुखार और सीने में कफ की जकड़न है। राहत न मिलने पर उन्हें मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। दारागंज की गुड्डी यादव भी डायरिया के कारण अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।

अटाला के असलम भी पिछले पांच दिनों से तेज बुखार और पेट में ऐंठन से बेहाल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ये मरीज दूषित पानी से नहीं, बल्कि मौसम के जानलेवा उतार-चढ़ाव के कारण बीमार हुए हैं। प्रचंड धूप के तुरंत बाद ठंडी हवाएं सेहत बिगाड़ रही हैं।

अस्पतालों की ओपीडी में अचानक तीस प्रतिशत बढ़े मरीज

गर्मियों में घरों और दफ्तरों के भीतर चल रहे एयर कंडीशनर और कूलर का तापमान नुकसान पहुंचा रहा है। ठंडे वातावरण से अचानक तेज गर्मी में निकलने से लोगों का शरीर इस बदलाव को झेल नहीं पा रहा है। इस कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में संक्रमण फैल रहा है।

अस्पतालों के ओपीडी वार्ड में इन दिनों बुखार, खांसी, सीने में जकड़न और डायरिया के मरीजों की भरमार है। केवल बड़े ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे भी इन मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों में निमोनिया और तेज बुखार के लक्षण दिख रहे हैं।

अस्पतालों की ओपीडी में मौसमी बीमारी और एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार महज एक सप्ताह के भीतर मरीजों की संख्या में 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। फिजीशियन की ओपीडी में अब रोजाना 170 मरीज आ रहे हैं।

प्रयागराज के अस्पतालों में अस्सी प्रतिशत बेड फुल

प्रयागराज जिले के शहरी क्षेत्रों में 3 बड़े सरकारी अस्पताल और 24 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह सक्रिय हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में 100 से अधिक अस्पताल काम कर रहे हैं। वर्तमान में इन सभी अस्पतालों के 80 प्रतिशत बेड पूरी तरह भर चुके हैं।

वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार शुरुआत में तीन दिनों तक केवल पैरासिटामोल दवा का ही सेवन करना चाहिए। अगर तीन दिनों के भीतर बुखार पूरी तरह ठीक न हो, तो तुरंत खून की जांच करानी जरूरी है। लोग बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं खाने से बचें।

शरीर के तापमान में अचानक होने वाला बदलाव ही इस बीमारी की सबसे प्रमुख वजह बन रहा है। लोग धूप से आते ही तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी पी लेते हैं। घर से बाहर का वातावरण भी इस समय पूरी तरह दूषित और अस्थिर बना हुआ है।

बदलते मौसम में इन बातों का रखें विशेष ध्यान

इस खतरनाक मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं। डॉक्टर रोजाना नींबू, नमक और चीनी की शिकंजी पीने की सलाह दे रहे हैं। बाहर जाते समय हमेशा पूरी तरह साफ और स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करें।

इसके अलावा रोजाना कम से कम एक बार हल्के गुनगुने पानी से गरारा जरूर करें। गर्मियों के इस मौसम में बासी खाना खाने से पूरी तरह परहेज करें। वातावरण में थोड़ी भी ठंडक होने पर हमेशा पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।

घरों में एयर कंडीशनर को लगातार चलाने के बजाय केवल एक या दो घंटे ही इस्तेमाल करें। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल में डायरिया और पेट दर्द वाले मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं। खांसी या बुखार ठीक न होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

Author: Asha Thakur

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