UP News: चिलचिलाती गर्मी में बच्चों को आइसक्रीम खाना बहुत पसंद होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ठंडी आइसक्रीम आपके बच्चों के लिए स्लो पॉइजन बन रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट ने हैरान कर दिया है। बाजार में बिकने वाली कई आइसक्रीम में यूरिया और डिटर्जेंट जैसे खतरनाक केमिकल मिले हैं।
गर्मी में मिलावटखोर कैसे करते हैं केमिकल का खेल
गर्मियों का मौसम आते ही आइसक्रीम की मांग काफी बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर पूरी तरह सक्रिय हो जाते हैं। दूध और क्रीम की जगह अब सिंथेटिक फैट का प्रयोग होता है। लागत कम करने के लिए सस्ते केमिकल और इंडस्ट्रियल कलर मिलाए जा रहे हैं। आइसक्रीम का टेक्सचर सुधारने के लिए डिटर्जेंट डाला जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले एक साल में मेरठ मंडल से कई सैंपल लिए। चार महीनों में लिए गए 529 नमूनों में से करीब 200 फेल हो गए हैं। इनमें खोया, पनीर और डेयरी उत्पाद शामिल थे। इन खराब उत्पादों का इस्तेमाल आइसक्रीम फैक्ट्रियों में धड़ल्ले से हो रहा था। वहीं सीधे आइसक्रीम के पचास प्रतिशत सैंपल फेल निकले हैं।
आइसक्रीम में मिलाए जा रहे हैं यह खतरनाक तत्व
अधिकारियों के मुताबिक दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए यूरिया का उपयोग होता है। जांच में कई खतरनाक चीजों की मिलावट मिली है। इनमें सिंथेटिक मिल्क, घटिया फैट, कृत्रिम रंग, दूषित पानी और एक्सपायर्ड डेयरी मटेरियल प्रमुख हैं। इसके अलावा सस्ते वेजिटेबल ऑयल और केमिकल पाउडर भी आइसक्रीम में मिलाए जाते हैं। यह शरीर के लिए बहुत घातक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया और डिटर्जेंट शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। बच्चों की इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है। इसलिए मिलावटी आइसक्रीम उनके पाचन तंत्र और किडनी पर तुरंत असर करती है। लगातार ऐसी चीजें खाने से बच्चों में फूड पॉइजनिंग और पेट में गंभीर संक्रमण हो जाता है। अस्पतालों में डायरिया के मामले बढ़ रहे हैं।
खराब आइसक्रीम का सेवन करने से बच्चों में कई गंभीर बीमारियां देखने को मिलती हैं। इनमें मुख्य रूप से उल्टी-दस्त, एलर्जी और स्किन रिएक्शन शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों में मोटापा और फैटी लिवर की समस्या भी बढ़ रही है। लंबे समय तक इसका सेवन करने से हार्मोनल गड़बड़ी और कमजोर इम्युनिटी की शिकायत भी सामने आती है।
पीडियाट्रिक एक्सपर्ट डॉ. नवरत्न गुप्ता के अनुसार सस्ती आइसक्रीम फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण है। वहीं सीनियर फिजिशियन डॉ. वीके मानते हैं कि सिंथेटिक फ्लेवर बच्चों के हार्मोनल सिस्टम पर असर डालते हैं। इससे मोटापा और एलर्जी जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ती हैं। सड़क किनारे बिना लाइसेंस बिकने वाली खुली आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होता है।
अस्पतालों में लगातार बढ़ रहे हैं पेट संक्रमण के मामले
बाल रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि गर्मियों में बच्चों के बीमार पड़ने का सिलसिला तेज हो जाता है। अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी और डायरिया के मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। कई बार पेरेंट्स इस बात को समझ ही नहीं पाते हैं कि यह सब बाहर बिकने वाली मिलावटी आइसक्रीम खाने की वजह से हुआ है।
सड़क किनारे खुले में बिकने वाली आइसक्रीम और ठंडे पेय पदार्थ सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता है। इसके साथ ही कोल्ड चेन को मेंटेन करना भी जरूरी नहीं समझा जाता है। यही लापरवाही बच्चों के लिए जानलेवा संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनती है।
नकली और मिलावटी आइसक्रीम की कैसे करें सही पहचान
मिलावटी आइसक्रीम की पहचान करना आसान है। इसका रंग ज्यादा चमकीला होता है और असामान्य खुशबू आती है। यह या तो जल्दी पिघलती है या बिल्कुल नहीं पिघलती। खाते समय मुंह में साबुन जैसा स्वाद आता है। इसमें बर्फ के बड़े क्रिस्टल बनते हैं। पैकेट पर लाइसेंस नंबर नहीं होता है और इसकी कीमत बेहद कम होती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी लगातार मिलावटी खाद्य पदार्थों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि मिलावटी डेयरी उत्पाद शरीर में स्लो पॉइजन की तरह काम करते हैं। विभाग समय-समय पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास भी करता है। लोगों को सही और सुरक्षित खानपान के बारे में लगातार जानकारी दी जाती है।
पेरेंट्स को अपने बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बच्चों को सड़क किनारे मिलने वाली सस्ती आइसक्रीम बिल्कुल न खिलाएं। हमेशा अच्छी और लाइसेंस वाली दुकानों से ही डेयरी उत्पाद खरीदें। बच्चों को घर पर बने ताजे फलों के जूस या ठंडी चीजें पीने की आदत डालें।
Author: Asha Thakur

