भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीबीआई जांच को दी मंजूरी, कहा- निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी

Madhya Pradesh News: भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ी सुनवाई की है। शीर्ष अदालत ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच को बेहद जरूरी बताया है। कोर्ट ने केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के राज्य सरकार के फैसले की सराहना की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि इस मामले में किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार ने पहले ही जांच को केंद्रीय एजेंसी को ट्रांसफर करने का लिखित प्रस्ताव दे दिया है, जो एक सराहनीय कदम है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मध्य प्रदेश सरकार का मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने बेहद भावुक और गंभीर टिप्पणी की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि समाज में एक तलाकशुदा बेटी बेहतर है, लेकिन किसी की मृत बेटी बिल्कुल नहीं।

न्यायिक पृष्ठभूमि के कारण निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले को लेकर आम जनता में काफी आक्रोश है। सार्वजनिक स्तर पर लगातार निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। अदालत ने सुनवाई के दौरान 18 मई को प्रकाशित एक चर्चित मीडिया रिपोर्ट का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।

पीठ ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में जांच के दौरान हुए कथित संस्थागत पक्षपात पर सवाल उठाए गए थे। केस के आरोपियों के परिवार का मजबूत न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा होना भी आम लोगों और पीड़ित परिवार के बीच गहरी चिंता का मुख्य कारण बना।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मृतका ट्विशा शर्मा के पति समार्थ सिंह खुद पेशे से वकील हैं। वहीं उनकी सास गिरीबाला सिंह मध्य प्रदेश में पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। इस कारण लोगों के मन में जांच प्रभावित होने की धारणा बन रही थी।

शीर्ष अदालत ने मीडिया और मामले से जुड़े दोनों पक्षों से एक खास अपील की है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सभी लोग सार्वजनिक बयानबाजी से बचें। सभी तथ्यों को केवल जांच एजेंसी के सामने ही रखा जाए।

भोपाल स्थित ससुराल में फंदे से लटकी मिली थी ट्विशा

बता दें कि 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा बीते 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल के घर में फंदे से लटकी पाई गई थीं। मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि ससुराल वाले उन्हें भारी दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित कर रहे थे।

परिजनों का कहना है कि यह सामान्य आत्महत्या नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर मामला है। दूसरी तरफ ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा लंबे समय से मानसिक तनाव और नशे की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं।

यह मामला तब और ज्यादा गरमा गया जब ट्विशा के परिजनों ने भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर धरना दिया था। मुख्यमंत्री के निष्पक्ष जांच के भरोसे के बाद राज्य सरकार ने केस सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी।

दिल्ली एम्स से दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग पर अड़ा परिवार

इस मामले में कार्रवाई करते हुए भोपाल की स्थानीय अदालत ने आरोपी पति समार्थ सिंह को पुलिस हिरासत में भेज दिया था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हो रही विसंगतियों को देखते हुए खुद स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी।

ट्विशा के परिवार ने मामले की दोबारा जांच के लिए एम्स दिल्ली से स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग की है। उनका आरोप है कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमॉर्टम में कई अहम शारीरिक पहलुओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया था।

परिजनों के मुताबिक ट्विशा के शरीर और हाथों पर गहरी चोटों के निशान मौजूद थे। डॉक्टरों ने उनकी गहराई और समय का सही वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया। इसके साथ ही मृतका की गर्दन और रीढ़ की कोई रेडियोलॉजिकल जांच भी नहीं की गई थी।

लगातार 12 दिन तक न्याय के लिए संघर्ष करने के बाद रविवार शाम को भोपाल में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई सैन्य अधिकारी मेजर हर्षित शर्मा ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। परिवार ने कहा कि यह न्याय की लड़ाई की शुरुआत है।

Author: Vijay Chouhan

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