कमला नेहरू अस्पताल: 100 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराया ‘एमएलए हॉस्टल’ का संकट, सुक्खू सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा!

Himachal News: हिमाचल की राजधानी शिमला में एक बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। सुक्खू सरकार द्वारा 102 साल पुराने ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल को शिफ्ट करने और उस स्थान पर एमएलए हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव ने भारी जनआक्रोश पैदा कर दिया है। इसे स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू का घोर अपमान माना जा रहा है। इसके साथ ही, यह फैसला लाखों गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ एक खतरनाक खिलवाड़ है। विरोध में लोग सड़कों पर हैं।

लेडी रीडिंग से लेकर कमला नेहरू अस्पताल तक का सफर

इस अस्पताल की नींव 1923 में लॉर्ड रीडिंग की पत्नी ने रखी थी। पहले इसे लेडी रीडिंग अस्पताल कहा जाता था। 15 अगस्त 1982 को वीरभद्र सिंह सरकार ने इसका नाम कमला नेहरू अस्पताल कर दिया। कमला नेहरू स्वतंत्रता संग्राम की एक निर्भीक सेनानी थीं। उनका जीवन महिला सशक्तिकरण को समर्पित रहा। उनके नाम पर बना यह मातृ अस्पताल सेवा और सुरक्षा के आदर्शों का प्रतीक है। यह हिमाचल प्रदेश का सबसे पुराना और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान माना जाता है।

मातृत्व केंद्र की जगह एमएलए हॉस्टल बनाने का विरोध

यह अस्पताल हिमाचल में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र रहा है। लाखों परिवारों की भावनाएं और सुरक्षित प्रसव की यादें इससे जुड़ी हैं। वर्तमान कांग्रेस सरकार इस ऐतिहासिक संस्थान से छेड़छाड़ कर रही है। इस महत्वपूर्ण स्थान पर विधायकों के लिए हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस अनुचित कदम को पूरी तरह से असंवेदनशील और जनविरोधी माना जा रहा है। सरकार का यह निर्णय आम जनता और गर्भवती महिलाओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं पर असर

रवि कुमार दलित में कहा कि इस अनुचित निर्णय से गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। आज मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की भारी जरूरत है। ऐसे समय में सरकार का यह कदम बिल्कुल विपरीत दिशा में जाता हुआ दिखता है। इस अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं और उन्नत उपकरणों के साथ विकसित किया जाना चाहिए था। बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के बजाय, अस्पताल की जमीन का अन्य कार्यों में उपयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

भ्रष्टाचार के आरोप और नौकरशाही के प्रभाव पर उठते सवाल

रवि कुमार दलित ने कहा कि सुक्खू सरकार के इस फैसले से साफ झलकता है कि उन्हें ऐतिहासिक संस्थानों की विरासत का उचित ज्ञान नहीं है। अनुभवहीनता के कारण इस महान मातृत्व केंद्र के अस्तित्व से खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि सरकार के आसपास ऐसे नौकरशाह मौजूद हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। मुख्य सचिव संजय गुप्ता जैसे अधिकारियों पर भूमि माफिया से मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बेहद घातक संकेत है।

जनआंदोलन की चेतावनी और फैसले पर पुनर्विचार की मांग

रवि कुमार दलित ने आंदोलन की चेतावनी देते हु कहा कि अहंकारी रवैया रखने वाली राज्य सरकार को जल्द ही भारी जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा। शिमला की जनता इस विनाशकारी निर्णय के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्ताव को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में तीखा विरोध देखने को मिलेगा। सरकार से सख्त मांग की गई है कि अस्पताल के ढांचे से छेड़छाड़ रोकी जाए। मातृत्व स्वास्थ्य को राजनीतिक स्वार्थ के लिए कमजोर करना पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है।

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