2200 करोड़ के कर्ज में डूबे HRTC को तगड़ा झटका: डीजल ने बढ़ाई टेंशन, क्या रुक जाएंगे बसों के पहिए?

Shimla News: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) एक बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। निगम पहले ही 2200 करोड़ रुपये के भारी घाटे में डूबा है। अब महंगे डीजल ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राज्य में डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं। इससे एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति और ज्यादा खराब होने का खतरा है। निगम पर अब हर महीने डेढ़ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बसों का संचालन चुनौती बन गया है।

एचआरटीसी हर महीने 35 से 36 करोड़ रुपये सिर्फ डीजल पर खर्च करता है। निगम के बेड़े में करीब 3200 बसें शामिल हैं। ये बसें रोजाना 5.60 लाख किलोमीटर का लंबा सफर तय करती हैं। लगातार बढ़ रहे सामाजिक दायित्वों के कारण निगम का घाटा कम नहीं हो रहा है। वर्तमान में निगम को हर महीने 10 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। यह घाटा सालाना 120 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।

लगातार बढ़ते घाटे के कारण एचआरटीसी अपने वित्तीय दायित्व पूरे नहीं कर पा रहा है। इसका सीधा असर कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ रहा है। निगम कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पा रहा है। कर्मचारियों को महीने की 10 तारीख के बाद ही वेतन मिल पाता है। वहीं, पेंशनरों को 25 तारीख तक अपनी पेंशन का इंतजार करना पड़ता है। निगम की कुल आमदनी का 55 फीसदी हिस्सा केवल डीजल और पेंशन पर खर्च होता है।

ई-बसों से हालात सुधरने की बड़ी उम्मीद

इस भारी घाटे से उबरने के लिए निगम अब इलेक्ट्रिक बसों की तरफ देख रहा है। परिवहन निगम के बेड़े में जल्द ही 297 नई ई-बसें शामिल होने वाली हैं। इन नई ई-बसों का ट्रायल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। निगम प्रबंधन चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएं। इससे महंगे डीजल की बड़ी बचत होगी और निगम की आय भी बढ़ेगी। निगम घाटे वाले रूटों को मर्ज करने पर भी विचार कर रहा है।

सरकारी ग्रांट पर निर्भर है निगम का पूरा खर्च

परिवहन निगम की महीने की कुल कमाई महज 75 करोड़ रुपये है। जबकि, निगम का हर महीने का कुल खर्च 140 करोड़ रुपये से ज्यादा है। राज्य सरकार हर महीने निगम को 55 से 60 करोड़ रुपये की ग्रांट देती है। यह सारी सरकारी ग्रांट कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में ही खर्च हो जाती है। अब डीजल महंगा होने के कारण निगम सरकार से अतिरिक्त ग्रांट की मांग करेगा। इसके लिए सरकार को जल्द एक नया प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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