Dhar Bhojshala Verdict: इंदौर हाईकोर्ट ने माना- राजा भोज की ‘भोजशाला’ मूल रूप से सरस्वती मंदिर ही है, आज से शुरू हुई नियमित पूजा!

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर विवाद पर एक युगांतरकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने इस पूरे विवादित स्थल को मूल रूप से वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर माना है। कोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हिंदू पक्ष को यहां नियमित पूजा-अर्चना करने का पूर्ण कानूनी अधिकार दे दिया है। इस बड़े अदालती फैसले के बाद शनिवार सुबह से ही सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु भोजशाला परिसर में दर्शन के लिए जुटने लगे हैं।

राजा भोज और परमार राजवंश के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा है यह पवित्र परिसर

उच्च न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में साफ कहा कि धार की भोजशाला मूल रूप से राजा भोज और परमार राजवंश काल से संबंधित है। यह स्थल प्राचीन काल में देवी वाग्देवी का एक अत्यंत भव्य मंदिर था। हिंदू समाज सदियों से इसे मां सरस्वती का पावन मंदिर मानता रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष इस स्थल पर कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता था। कई दशकों से अदालतों में चल रहे इस गंभीर विवाद पर अब इंदौर हाईकोर्ट ने पूरी तरह विराम लगा दिया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास ही सुरक्षित रहेगा पूरा प्रशासनिक नियंत्रण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुख्य वकील अविरल विकास खरे ने इस अदालती आदेश की बारीकियों को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि भोजशाला वर्ष 1904 से ही एक राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित है। उच्च न्यायालय ने साफ किया है कि परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण और उसकी सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह ही पूरी तरह एएसआई के पास ही रहेगी। कोर्ट ने एएसआई के पुराने नियमों में बड़ा फेरबदल करते हुए हिंदू समुदाय के पक्ष में फैसला सुनाया है।

इंदौर हाईकोर्ट ने साल 2003 के प्रशासनिक नमाज आदेश को किया आंशिक रूप से रद्द

अदालत ने अपने नए आदेश में एएसआई द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी किए गए पुराने फैसले को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। उस पुराने आदेश के तहत मुस्लिम पक्ष को प्रत्येक शुक्रवार को परिसर के भीतर नमाज अदा करने की विशेष अनुमति मिली हुई थी। हाईकोर्ट ने अब उस व्यवस्था को बदलते हुए पूरे परिसर में केवल हिंदू समुदाय को ही बिना किसी बाधा के नियमित पूजा करने का विशेष अधिकार सौंप दिया है।

ऐतिहासिक फैसले के बाद धार की भोजशाला में उमड़ा श्रद्धालुओं का भारी सैलाब

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शनिवार को तड़के सुबह से ही धार जिले में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर के भीतर प्रवेश करके पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना संपन्न की। मीडिया से बात करते हुए एक भावुक श्रद्धालु ने कहा कि कई पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद आज हमें बिना किसी रोक-टोक के मां सरस्वती की आराधना करने का यह पावन सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

लंदन के म्यूजियम से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने की उठी मांग

हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस अदालती जीत को भारत के सांस्कृतिक न्याय का एक स्वर्णिम अध्याय बताया है। उन्होंने कहा कि इंदौर हाईकोर्ट का यह आदेश वैज्ञानिक तथ्यों और ऐतिहासिक सबूतों पर आधारित है। विष्णु शंकर जैन ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने मुकदमे के दौरान लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में कैद मां वाग्देवी की मूल ऐतिहासिक प्रतिमा को कानूनी प्रक्रिया के जरिए वापस भारत लाने का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया है।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जंग की तैयारी, कैविएट दाखिल

इस ऐतिहासिक फैसले के आते ही दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से तुरंत दो कैविएट याचिकाएं दाखिल कर दी गई हैं। हिंदू संगठन यह अच्छी तरह जानते हैं कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। इसी संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए पहले ही कैविएट दायर की गई है, ताकि सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष की दलीलें सुने बिना कोई एकतरफा स्टे ऑर्डर जारी न करे।

संवेदनशील माहौल को देखते हुए धार जिले में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात

अदालती फैसले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए धार जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीना खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस प्रशासन ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अफवाह फैलाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। ग्रामीण इलाकों में भी शांति मार्च निकाला जा रहा है।

संस्कृत अध्ययन और प्राचीन भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र थी भोजशाला

प्राचीन भारतीय इतिहास के अनुसार धार की भोजशाला को राजा भोज द्वारा स्थापित शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति का एक महान विश्वविद्यालय माना जाता था। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि यह स्थान पूरे आर्यावर्त में संस्कृत अध्ययन और वेदों के शोध का सबसे प्रमुख केंद्र हुआ करता था। बाद के कालखंडों में विदेशी आक्रमणों के कारण इस परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर एक लंबा विवाद खड़ा हो गया था, जो अब सुलझ गया है।

Hot this week

Related News

Popular Categories