Major General GD Bakshi Warning: ‘दुनिया में शुरू हो चुकी है नई महाभारत…’, भारतीय सेना के पूर्व जनरल ने देश को दी सबसे बड़ी चेतावनी!

Global News: दुनिया इस समय बेहद अस्थिर और खतरनाक भू-राजनीतिक दौर से गुजर रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और सैन्य टकराव के बीच भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल जी.डी. बक्शी ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संकट का निकट भविष्य में कोई अंत नजर नहीं आता। जनरल बक्शी ने इसे एक ‘नई महाभारत’ करार देते हुए कहा कि भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।

लकी बिस्ट के चर्चित पॉडकास्ट में जनरल बक्शी ने बयां किया कड़वा सच

पूर्व सैन्य कमांडर मेजर जनरल जीडी बक्शी (SM VSM) ने पूर्व खुफिया अधिकारी और मशहूर पॉडकास्टर लकी बिस्ट (Lucky Bisht) के टॉक शो ‘लकी बीस्ट पॉडकास्ट’ में यह महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ भीषण सैन्य संघर्ष भड़क रहे हैं। इन युद्धों के कारण आने वाले दिनों में वैश्विक शक्ति संतुलन और अधिक बिगड़ेगा। यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल रही है।

पारंपरिक मोर्चों से आगे निकलकर अब नए हथियारों के दौर में पहुंचा युद्ध

जनरल बक्शी के अनुसार आज की लड़ाई केवल सीमाओं और पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया इस समय साइबर युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, खुफिया ऑपरेशनों और खतरनाक सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉर) के दौर से गुजर रही है। टैंकों के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी और ड्रोन हमलों ने युद्ध का पूरा स्वरूप बदल दिया है। इस जटिल माहौल में कोई भी देश खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता है।

दुश्मन को मात देने के लिए देशवासियों को अभेद्य दीवार की तरह होना होगा एकजुट

पूर्व मेजर जनरल ने भारत सरकार को सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर अपनी तैयारी और तेज करने की सलाह दी है। उन्होंने देश की जनता को एक विशेष संदेश देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्रीय संकट के समय सबसे बड़ी ताकत आंतरिक एकता होती है। भारतीयों को इन वैश्विक हालातों से डरने के बजाय एकजुट होना चाहिए। संकट की इस घड़ी में पूरे देश को एक अभेद्य दीवार की तरह खड़ा होना होगा।

मध्य पूर्व में इजराइल और ईरान के सीधे टकराव से हालात बेहद विस्फोटक

वर्तमान में मिडल ईस्ट के हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच जारी युद्ध के बीच इजराइली सेना लगातार हवाई हमले कर रही है। हाल ही में इजराइल ने हमास के शीर्ष कमांडर इज अल-दीन अल-हदाद को निशाना बनाया। दूसरी तरफ, ईरान और इजराइल के बीच सीधा सैन्य टकराव शुरू होने से हिजबुल्लाह, इराकी मिलिशिया और यमन के हूती विद्रोही भी क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट

यमन के हूती विद्रोही लगातार लाल सागर (Red Sea) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इस कारण पूरी दुनिया की तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी देशों ने इसके जवाब में क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों को डर है कि यदि यह तनाव और बढ़ा, तो पूरा मध्य पूर्व एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस सकता है।

तीसरे वर्ष में पहुंची रूस और यूक्रेन की लंबी और बेहद थकाऊ लड़ाई

इधर यूरोप में रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। रूसी सेना लगातार पूर्वी यूक्रेन के मोर्चों पर अपना दबाव बढ़ा रही है। रूस ने अपनी पूरी रक्षा इंडस्ट्री को युद्ध मोड में डाल दिया है, जिससे उसके हथियारों की आपूर्ति निर्बाध जारी है। वहीं दूसरी तरफ, यूक्रेन पूरी तरह से नाटो (NATO) देशों से मिलने वाले हथियारों, ट्रेनिंग और खुफिया सहायता पर निर्भर है।

परमाणु हथियारों की धमकी के बीच वैश्विक आर्थिक मंदी का बढ़ा बड़ा खतरा

इस लंबी लड़ाई के कारण यूक्रेन का पूरा ऊर्जा ढांचा और प्रमुख शहर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। पश्चिमी देशों की मदद के बावजूद यूक्रेनी सेना इस समय सैनिकों और गोला-बारूद की भारी कमी से जूझ रही है। रूस लगातार पश्चिमी देशों पर प्रॉक्सी वॉर लड़ने का आरोप लगा रहा है। क्रेमलिन की ओर से बार-बार आ रही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी ने पूरी दुनिया की चिंता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

तनाव के बीच भारत की संतुलित कूटनीति और मजबूत आर्थिक नीतियां

इस दोहरे वैश्विक संकट के बीच भारत लगातार एक बेहद संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का पालन कर रहा है। भारत एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने रक्षा और ऊर्जा सहयोग को मजबूती से बनाए हुए है। वहीं दूसरी ओर, वह अमेरिका, इजराइल और खाड़ी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक संबंधों को नया विस्तार दे रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं।

महाशक्तियों के नए शीत युद्ध के बीच एक बड़ी रणनीतिक ताकत बनकर उभरा भारत

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका-चीन के बीच जारी आर्थिक प्रतिस्पर्धा और यूक्रेन-मिडल ईस्ट संकट दुनिया को एक नए शीत युद्ध की ओर ले जा रहे हैं। इन विपरीत परिस्थितियों के बीच भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत और जिम्मेदार रणनीतिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। ऐसे दौर में भारत के लिए अपने खुफिया तंत्र, सैन्य आधुनिकीकरण और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना सबसे जरूरी हो गया है।

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