Delhi News: भारत में करोड़ों की संपत्ति रखने वाले अमीर लोग आखिर विदेशों में क्यों बसना चाहते हैं? यह गंभीर सवाल एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। जाने-माने उद्यमी और लेखक संदीप मॉल के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मुद्दे पर एक नई और तीखी बहस छेड़ दी है।
दिल्ली-एनसीआर के निवासी संदीप मॉल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बेहतर करियर के लिए विदेश जाने वालों की वजह समझ आती है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि जिनके पास पहले से ही पर्याप्त धन-दौलत है, वे भारत में ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक जीवन छोड़कर बाहर क्यों जा रहे हैं।
खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रैफिक जाम से करोड़पति भी परेशान
संदीप मॉल की इस सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद इंटरनेट यूजर्स की तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों का मानना है कि भारत में अथाह पैसा होने के बावजूद आप रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं से बिल्कुल भी नहीं बच सकते हैं।
बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल शांतनु गोयल ने लिखा कि अमीर और गरीब दोनों को एक जैसी खराब सड़कों, भारी ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार एक करोड़पति व्यक्ति भी सड़क पर निकलने के बाद उन्हीं नागरिक चुनौतियों से जूझता है।
एक अन्य यूजर नितिन सिन्हा ने कहा कि आलीशान गेटेड सोसायटी के अंदर जिंदगी भले ही बहुत शानदार लगे, लेकिन बाहर कदम रखते ही प्रदूषण और अव्यवस्थित ट्रैफिक से सामना होता है। लोगों ने तर्क दिया कि विदेशों में स्वच्छ हवा, मजबूत कानून व्यवस्था और बेहतर लाइफस्टाइल मिलती है।
सामाजिक भरोसे की कमी और बढ़ता नैतिक भ्रष्टाचार बड़ी वजह
इस तीखी आलोचना के जवाब में संदीप मॉल ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन वाले लोग शुद्ध पानी, बेहतरीन भोजन और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी कई बुनियादी समस्याओं का निजी समाधान स्वयं आसानी से कर सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह कड़वी बात भी स्वीकार की कि यदि वे खुद कभी भविष्य में विदेश जाने पर विचार करेंगे, तो उसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय समाज में सामाजिक भरोसे की भारी कमी और लगातार बढ़ता नैतिक भ्रष्टाचार ही होगी।
भारतीय संस्कृति, अपनापन और पारिवारिक रिश्ते हैं सबसे बड़ी पूंजी
इस बड़ी बहस के दौरान कई इंटरनेट यूजर्स ने भारत में रहने के पक्ष में भी बेहद मजबूत और व्यावहारिक तर्क दिए। कुछ लोगों का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक डिस्पोजेबल आय बीस से पच्चीस लाख रुपये है, तो भारत दुनिया का सबसे बेहतरीन देश है।
यहाँ बेहद कम लागत में घरेलू सहायता, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और एक सुविधाजनक जीवनशैली आसानी से मिल जाती है। एक लेखक ने ऑस्ट्रेलिया, दुबई और सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर भले ही आधुनिक हो, लेकिन भारत जैसा सामाजिक जुड़ाव और पारिवारिक अपनापन दुनिया में कहीं नहीं है।
Author: Karuna Sen


