Delhi News: सितंबर 2025 में माल और सेवा कर यानी जीएसटी दरों में कटौती से आम जनता को मिली बड़ी राहत अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। बाजार में लगातार बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर रसोई का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा के जरूरी सामान की कीमतें बढ़ने से मध्यम वर्ग काफी परेशान है।
पिछले साल सितंबर महीने में जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान कुल 375 से अधिक घरेलू उत्पादों पर टैक्स घटाया गया था। इस सरकारी फैसले से आम उपभोक्ताओं को करीब पांच महीने तक सस्ती कीमतों का लाभ मिला। मगर फरवरी 2026 से शुरू हुई इस आर्थिक मंदी और महंगाई ने मई तक सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।
जीएसटी स्लैब में बदलाव से मिली थी बड़ी राहत
जीएसटी परिषद ने 12 फीसदी और 28 फीसदी वाले टैक्स स्लैब को खत्म कर अधिकांश सामानों को 5 फीसदी और 18 फीसदी के दायरे में ला दिया था। इसके तहत दूध, ब्रेड और ताजी रोटी जैसी जरूरी चीजें पूरी तरह टैक्स मुक्त कर दी गई थीं। बिस्किट, साबुन और शैंपू पर भी टैक्स घटा था।
इसके विपरीत तंबाकू उत्पादों, शीतल पेयों और विलासिता की महंगी कारों पर टैक्स बढ़ाकर सीधे 40 फीसदी कर दिया गया था। जीवन रक्षक दवाओं और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को भी टैक्स से बाहर रखकर राहत दी गई थी। मगर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने इस राहत को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
लागत बढ़ने से पैक्ड सामान के दाम आसमान पर
स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बाजार में बिकने वाले करीब 60 फीसदी पैक्ड उपभोक्ता उत्पाद अब टैक्स कटौती के पहले वाले दौर से भी ज्यादा महंगे हो चुके हैं। इस साल अप्रैल के दौरान पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतों में रिकॉर्ड 17.66 प्रतिशत की सबसे तेज घरेलू और व्यावसायिक वृद्धि देखी गई है।
कागज, मेटल पैकेजिंग, रेजिन और कार्डबोर्ड के दाम बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। यही वजह है कि जनवरी में 36 रुपये में मिलने वाला 100 ग्राम बिस्किट का पैकेट अब फिर 40 रुपये का हो गया है। इसी तरह एक लीटर रिफाइंड तेल की कीमत भी बढ़कर 170 रुपये पहुंच गई है।
बढ़ती महंगाई के पीछे के मुख्य कारण और आंकड़े
उत्पादन लागत में भारी वृद्धि, महंगी लेबर कॉस्ट और प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री के दाम बढ़ने से बाजार का पूरा गणित बिगड़ गया है। कई बड़ी कंपनियां घाटे से बचने के लिए अपने पैकेट का वजन घटा रही हैं। सरकार की निगरानी सूची में शामिल 80 प्रतिशत सामान 21 सितंबर 2025 से महंगे हैं।
बाजार के नए आंकड़ों के अनुसार एक किलो अमूल घी अब 645 रुपये से बढ़कर 665 रुपये का हो चुका है। बासमती चावल का भाव भी 75 रुपये से बढ़कर 85 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। इसके अलावा 50 किलो सीमेंट की बोरी सीधे 440 रुपये तक बिक रही है।
इसके साथ ही 190 रुपये वाला टैल्कम पाउडर अब 210 रुपये में मिल रहा है। डेढ़ टन क्षमता का ब्रांडेड एसी अब 28,600 रुपये के मुकाबले सीधे 34,000 रुपये का हो चुका है। कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक युद्ध और महंगे पेट्रोल-डीजल के कारण माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ गई है।
Author: Rajesh Kumar


