Delhi News: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत की खबरें आ रही हैं। इस आंतरिक कलह के कारण टीएमसी के कई सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह घटनाक्रम संसद में एनडीए सरकार को बहुत मजबूत कर सकता है।
जुलाई के तीसरे सप्ताह में संसद का महत्वपूर्ण मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार इस सत्र में बहुप्रतीक्षित परिसीमन बिल दोबारा पेश कर सकती है। यह महत्वपूर्ण बिल पिछले अप्रैल महीने में दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण लोकसभा में पास नहीं हो पाया था।
ममता की पार्टी में बड़ी बगावत से चमकी एनडीए की किस्मत
लोकसभा में वर्तमान समय में टीएमसी के कुल उनतीस सांसद मौजूद हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग बीस सांसद अलग गुट बना सकते हैं। यह बागी गुट संसद के आगामी सत्र में सीधे एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन दे सकता है।
संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए कुल तीन सौ बासठ सदस्यों की आवश्यकता होती है। तीन सांसदों के असामयिक निधन के बाद यह प्रभावी जादुई आंकड़ा घटकर केवल तीन सौ साठ रह गया है। एनडीए के पास पहले से ही दो穩सौ तिरानवे सांसदों का समर्थन है।
यदि टीएमसी के बीस बागी सांसद सरकार के साथ आते हैं तो यह आंकड़ा तुरंत तीन सौ तेरह हो जाएगा। उधर तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस से नाराज चल रही डीएमके के बाईस सांसद भी कुछ विशेष मुद्दों पर सरकार की मदद कर सकते हैं।
उद्धव गुट के सांसदों पर भी टिकी बीजेपी की नजर
बीजेपी की रणनीतिक नजर अब उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना के नौ सांसदों पर भी टिकी हुई है। इनमें से कम से कम छह सांसदों के एनडीए के पाले में आने की पुरजोर संभावना है। इन सभी समीकरणों के सही बैठने से सरकार का कुल आंकड़ा तीन सौ अड़तालीस तक पहुंच जाएगा।
संसद में संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए मौजूद और वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। उधर राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति पहले से काफी बेहतर है। राज्यसभा में सरकार एक सौ पचास से अधिक सीटों के साथ बहुमत के बेहद करीब है।
Author: Harikarishan Sharma


