Ahmedabad News: अहमदाबाद में एअर इंडिया के विमान एआई-171 हादसे को आज पूरा एक साल बीत गया है। पिछले साल हुए इस वीभत्स हादसे में 260 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह विमान हादसा उड़ान भरने के महज कुछ ही मिनटों के भीतर हवा में ही हो गया था।
इस भयानक हादसे में विमान में सवार लोग तो मारे ही गए, साथ ही आसमान से भारी मलबा गिरने की वजह से नीचे जमीन पर मौजूद कई निर्दोष लोग भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे थे। हालांकि, इस विनाशकारी हादसे में एक ऐसा शख्स भी था जो मौत के मुंह से जिंदा बच निकला।
विश्वास कुमार रमेश इस हादसे के इकलौते गवाह और विजेता के रूप में दुनिया के सामने आए। लेकिन चमत्कारिक रूप से जिंदा बचने के बाद भी वह आज कई तरह की असहनीय तकलीफों का सामना कर रहे हैं। उनके लिए सामान्य जीवन जीना अब एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
जिंदा बचना मुश्किलों का अंत नहीं
हादसे के एक साल गुजर जाने के बाद रमेश का कहना है कि जिंदा बच जाना उनकी मुश्किलों का अंत नहीं था। एक ओर वह मीडिया, सोशल मीडिया और टीवी इंटरव्यू में चर्चा का विषय बने रहे कि वह आखिर कैसे बच गए, लेकिन दूसरी तरफ वह कई गंभीर मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उनके लिए अब जिंदगी का एक-एक पल बहुत मुश्किलों भरा साबित हो रहा है। वह पिछले एक साल से गंभीर अनिद्रा, भयंकर एंग्जायटी और हादसे से जुड़ी खौफनाक यादों के साथ जी रहे हैं। ये डरावनी यादें हर वक्त उनके साथ एक साये के रूप में चलती रहती हैं।
विमान हादसे की पहली बरसी पर जारी एक भावुक बयान में रमेश कुमार ने कहा कि लोग सिर्फ यह देखते हैं कि मैं जिंदा बच गया। लेकिन वे हमेशा उन चुनौतियों और संघर्षों को नहीं देख पाते, जो बंद दरवाजों के पीछे मेरे साथ हर पल बनी रहती हैं।
अहमदाबाद के पास बारह जून दो हजार पच्चीस को हुआ यह विमान हादसा भले ही महज कुछ सेकंड का रहा हो, लेकिन रमेश का मानना है कि इसका गहरा मानसिक असर उन पर तब से लेकर आज तक हर दिन और हर पल बना हुआ है।
भाई को खोने का सबसे बड़ा गम
अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुआ ड्रीमलाइनर विमान टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद बीजे मेडिकल कॉलेज कैंपस के ऊपर क्रैश हो गया था। इसमें सवार दो सौ बयालीस लोगों में से दो सौ एकतालीस और जमीन पर मौजूद उन्नीस लोगों की मौत हो गई थी।
रमेश गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद इस मलबे से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे थे। इस विमान में उनके सगे भाई अजय भी बैठे हुए थे, जो इस हादसे में मारे गए। दोनों भाई भारत में अपने परिवार से मिलने के बाद वापस लंदन लौट रहे थे।
उन्होंने रुंधे गले से कहा कि मैं भले ही जिंदा रहने के लिए ईश्वर का शुक्रगुजार हूं, लेकिन जिंदा बचना मेरी कहानी का एक छोटा सा हिस्सा भर है। तब से लेकर आज तक मैंने जो कुछ भी मानसिक रूप से झेला है, उसे शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है।
रमेश गुजराती मूल के ब्रिटिश नागरिक हैं। भारत के इतिहास के सबसे भयानक विमान हादसों में से एक में जिंदा बचने की वजह से वह पूरी दुनिया में रातों-रात सुर्खियों में आ गए थे। हादसे के तुरंत बाद खून से लथपथ रमेश की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।
‘चारों ओर बिछी थीं सिर्फ लाशें’
हादसे के कुछ घंटों बाद वह अस्पताल के बेड से बात करते हुए टीवी स्क्रीन पर दिखे थे। उन्होंने जलते मलबे और लाशों के बीच होश में आने और फिर वहां से भागने की रोंगटे खड़े करने वाली घटना बताई थी। उन्होंने कहा था कि जब मैं उठा, तो चारों ओर लाशें थीं।
पिछले एक साल में उन्होंने कई इंटरव्यू दिए और इस दौरान वह अपने भाई को खोने के नुकसान का जिक्र करते रहे। उनका कहना है कि उनकी शारीरिक चोटें तो समय के साथ ठीक हो गईं, लेकिन उनके भावनात्मक और मानसिक घावों से उबरना नामुमकिन साबित हो रहा है।
उनके करीबियों का कहना है कि रमेश को हादसे के दृश्य बार-बार याद आते हैं। इस वजह से उन्होंने खुद को अकेले कमरे में बंद कर लिया है और लोगों से मेल-जोल भी पूरी तरह कम कर दिया है। वह एक गहरे सदमे में जीने को मजबूर हैं।
इंजनों का फ्यूल स्विच अचानक हुआ बंद
बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान दो सौ बयालीस यात्रियों और क्रू मेंबर्स के साथ अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ा था। लेकिन उड़ान भरने के महज बत्तीस सेकंड बाद ही विमान में तकनीकी खराबी आ गई और वह कॉलेज कैंपस की इमारतों पर गिर गया।
जांचकर्ताओं ने पिछले एक साल में यह पता लगाने की रात-दिन कोशिश की है कि उन आखिरी पलों में कॉकपिट के भीतर क्या हुआ था। शुरुआती जांच रिपोर्ट से पता चला कि उड़ान भरते ही दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पोज़िशन में चले गए थे।
फ्यूल स्विच बंद होने से विमान के दोनों इंजनों को ईंधन मिलना पूरी तरह बंद हो गया था। रिपोर्ट में कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की बातचीत का भी खुलासा हुआ है, जिसमें एक पायलट दूसरे से पूछता है कि फ्यूल क्यों बंद किया, जिस पर दूसरा कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया।
Author: Smit Patel


