Uttar Pradesh News: सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान अर्पित की जाने वाली हर चीज का स्पेशल धार्मिक महत्व होता है। गॉड्स को खुश करने के लिए भक्त फूल, फल, अक्षत और जल चढ़ाते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी वर्जित चीजों का भी जिक्र है, जिन्हें चढ़ाने से पूजा की शुद्धता पर असर पड़ता है।
भगवान विष्णु और शिव की पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल है बैन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में खंडित चावल यानी टूटे हुए अक्षत अर्पित नहीं करने चाहिए। विष्णु पूजा में हमेशा फ्रेश और साफ अक्षत का ही उपयोग करना शुभ माना गया है। इसके अलावा आक और धतूरा भी भगवान विष्णु को कभी नहीं चढ़ाए जाते हैं।
ये दोनों वस्तुएं मुख्य रूप से भगवान शिव से जुड़ी मानी जाती हैं। शास्त्रीय संदर्भों में पद्म पुराण और स्कंद पुराण में इस प्रकार के पूजन नियमों का डिटेल में उल्लेख मिलता है। पूजा में इन गाइडलाइंस का ध्यान रखकर भक्त अपनी लाइफ में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल चढ़ाना पूरी तरह बैन माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु के विवाद में केतकी के फूल ने असत्य गवाही दी थी। इससे नाराज होकर शिव जी ने केतकी को अपनी पूजा से हमेशा के लिए रिजेक्ट कर दिया था।
गणेश जी, सूर्य देव और माता दुर्गा की पूजा के जरूरी नियम
हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है, लेकिन भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल चढ़ाना लकी नहीं माना जाता। पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी ने गणेश जी को मैरिज प्रपोजल दिया था, जिसे उन्होंने रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को शाप दिया था।
धर्मशास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी देवी-देवता को बासी या सड़ा-गला फल अर्पित नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा में ताजे, क्लीन और शुद्ध फल ही चढ़ाने चाहिए। अपवित्र फल अर्पित करना अशुभ माना जाता है, जिसका उल्लेख मनुस्मृति में मिलता है।
भगवान सूर्य की पूजा में बिल्व पत्र चढ़ाने की परंपरा सामान्यतः नहीं मानी जाती। सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए लाल फूल, गुड़ और जल अर्पित करना अधिक शुभ माना गया है। किसी भी विशेष व्रत या अनुष्ठान के समय लोकल पंडित की एडवाइस जरूर लेनी चाहिए।

