वृंदावन में बना दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर: बुर्ज खलीफा से भी गहरी है नींव, क्या पीएम मोदी करेंगे चंद्रोदय मंदिर का उद्घाटन?

Uttar Pradesh News: कान्हा की नगरी वृंदावन में आस्था और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत संगम साकार होने जा रहा है। छटीकरा रोड पर स्थित अक्षय पात्र परिसर में बन रहा ‘चंद्रोदय मंदिर’ अब अपने उद्घाटन के लिए पूरी तरह तैयार है। लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य मंदिर को पूर्ण होने में 12 साल का लंबा समय लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 से 30 मई के बीच इस 70 मंजिला गगनचुंबी मंदिर का लोकार्पण कर सकते हैं।

बुर्ज खलीफा को मात देती मंदिर की मजबूत नींव

इस मंदिर की भव्यता का अंदाजा इसकी ऊंचाई और गहराई से लगाया जा सकता है। 210 मीटर ऊंचे इस मंदिर को मजबूती देने के लिए जमीन के अंदर 55 मीटर गहरी नींव खोदी गई है। यह गहराई दुबई की मशहूर इमारत बुर्ज खलीफा की नींव से भी 5 मीटर अधिक है। मंदिर का बेस 12 मीटर ऊंचा रखा गया है ताकि यह सदियों तक सुरक्षित रहे। मंदिर के भीतर चैतन्य महाप्रभु और राधा-कृष्ण के दर्शन के लिए तीन अलग-अलग तल बनाए गए हैं।

टेलिस्कोप से ताज का दीदार और द्वापर युग का अहसास

चंद्रोदय मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यूइंग गैलरी है। मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर हाई-पावर टेलिस्कोप लगाए जाएंगे, जहां से करीब 80 किलोमीटर दूर आगरा के ताजमहल को साफ देखा जा सकेगा। मंदिर में नागर शैली और आधुनिक वास्तुकला का बेहतरीन मिश्रण दिखता है। यहां भगवान की ‘देवलीला’ को प्रदर्शित करने के लिए अत्याधुनिक 4D तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक भक्तों को सीधे द्वापर युग की दिव्य सैर कराने का अनुभव प्रदान करेगी।

आर्टिफिशियल यमुना और वृंदावन के घने जंगलों का पुनर्जन्म

मंदिर प्रशासन ने मंदिर के चारों ओर पुराने वृंदावन जैसा वातावरण तैयार करने की कोशिश की है। परिसर में यमुना जी का एक कृत्रिम प्रतिरूप बनाया गया है, जहां श्रद्धालु नौका विहार का आनंद ले सकेंगे। साथ ही चारों ओर घने जंगल विकसित किए गए हैं जो प्राकृतिक शांति का अहसास कराते हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा रखी गई आधारशिला से शुरू हुआ यह सफर अब अपने ऐतिहासिक पड़ाव पर है। फिलहाल मथुरा प्रशासन को दिल्ली से अंतिम हरी झंडी का इंतजार है।

इंजीनियरिंग और आध्यात्म का बेजोड़ वैश्विक नमूना

चंद्रोदय मंदिर का निर्माण इस्कॉन बेंगलुरु का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसकी ऊंचाई और विशालता इसे वैश्विक पर्यटन और आध्यात्म के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी। इस्कॉन के पदाधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र होगा बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन मूल्यों का सेतु बनेगा। भक्त अब उस पल की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब प्रधानमंत्री मोदी के हाथों इस भव्य धाम के कपाट आम जनता के लिए खोले जाएंगे। इससे ब्रज क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलेगी।

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