Delhi News: भावुक या इमोशनल होना एक बेहद खूबसूरत मानवीय गुण है, जिसे साफ दिल और मासूमियत की निशानी माना जाता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात पर रोने लगता है, तो यह स्थिति उसके लिए परेशानी का सबब बन जाती है। कई बार अत्यधिक गुस्सा आने, बहुत ज्यादा तनाव होने या किसी की मामूली सी बात चुभ जाने पर भी लोगों की आंखों से आंसू बहने लगते हैं।
कुछ लोग स्वभाव से इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं कि तेज भूख लगने, शारीरिक थकान होने या किसी करीबी की बात दिल पर लग जाने पर वे खुद के जज्बातों को बिल्कुल संभाल नहीं पाते हैं। शुरुआती दौर में हर बात पर रोना आना एक सामान्य व्यवहार लग सकता है। लेकिन अगर यह सिलसिला लगातार जारी रहे, तो यह आपकी कमजोर मानसिक और नाजुक भावनात्मक स्थिति का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
जानिए क्यों कुछ लोग हो जाते हैं जरूरत से ज्यादा संवेदनशील
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा इमोशनल होना और बात-बात पर रोना कई अंदरूनी कारणों से जुड़ा हो सकता है। जीवन में लगातार बना रहने वाला तनाव, नींद की भारी कमी, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और लंबे समय तक अपनी भावनाओं को दबाकर रखना इंसान को अंदर से पूरी तरह कमजोर बना देता है। हर बात पर रोने से समाज और वर्कप्लेस पर लोग आपको कमजोर समझने लगते हैं।
अपनी इस कमजोरी को दूर करने और खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत यानी इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए आपको अपनी आदतों में कुछ छोटे बदलाव करने होंगे। मनोविज्ञान के अनुसार, जज्बातों पर काबू पाना कोई मुश्किल काम नहीं है, इसके लिए बस थोड़े से अभ्यास की जरूरत होती है। आइए जानते हैं उन बेहद आसान और असरदार वैज्ञानिक तरीकों के बारे में, जो आपको मानसिक रूप से फौलाद बना देंगे।
गहरी सांसें और तुरंत पानी पीना दिमाग को देता है बड़ा ब्रेक
विभिन्न शोधों के मुताबिक, जब इंसान अत्यधिक गुस्से, तनाव या भावनात्मक दबाव में होता है, तो उसके दिल की धड़कन और सांसें बहुत तेज हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में 10 सेकंड तक धीरे-धीरे गहरी सांस लेना आपके अशांत दिमाग को तुरंत शांत करने में मदद करता है। आप 4 सेकंड तक सांस अंदर खींचें, उसे कुछ सेकंड रोकें और फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इससे शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स तुरंत कम हो जाता है।
इसके अलावा, अगर आपको अचानक गुस्से या भारी तनाव के कारण रोना आ रहा हो, तो तुरंत एक ग्लास थोड़ा ठंडा पानी पिएं। दरअसल, रोने की स्थिति में हमारा शरीर और दिमाग दोनों हाई इमोशनल मोड में चले जाते हैं। ऐसे नाजुक समय में घूंट-घूंट करके धीरे-धीरे पानी पीना हमारे दिमाग को कुछ सेकंड का जरूरी ब्रेक देता है, जिससे हमारा ध्यान दुखद भावनाओं से तुरंत हटने लगता है।
मूड स्विंग्स को रोकने के लिए भूख और फोकस को करें नियंत्रित
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कम होने से मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ता है। इसी वजह से कई बार तेज भूख लगने पर लोग सामान्य से कहीं ज्यादा इमोशनल या कमजोर महसूस करने लगते हैं। ऐसे समय में खाली पेट रहने के बजाय तुरंत फल, ड्राई फ्रूट्स, मखाना या कोई भी हल्का हेल्दी स्नैक खा लें, जो आपके मूड को तुरंत बैलेंस कर देगा।
जब हम लगातार उसी दुखद बात के बारे में सोचते रहते हैं जिसने हमें ठेस पहुंचाई है, तो रोना और ज्यादा बढ़ जाता है। इस चक्र को तोड़ने के लिए अपने दिमाग का फोकस दूसरी चीजों पर तुरंत शिफ्ट करें। उदाहरण के लिए, अपने कमरे में मौजूद किन्हीं 5 चीजों के नाम गिनें, अपना पसंदीदा संगीत सुनें या कुछ मिनटों के लिए खुली हवा में टहल लें। इससे दिमाग का ध्यान पूरी तरह बदल जाता है।

