कड़कड़डूमा कोर्ट में महिला वकील पर बर्बर हमला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, गायब बच्चों और अस्पतालों की लापरवाही पर बिफरे CJI

Delhi News: राजधानी के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में एक महिला वकील पर हुए जानलेवा हमले ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत को झकझोर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस बर्बर घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। पीड़िता के पति द्वारा किए गए इस हमले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न केवल आरोपी की गिरफ्तारी बल्कि गायब बच्चों की तलाश और अस्पतालों की संवेदनहीनता पर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं।

अस्पतालों की संवेदनहीनता पर भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत उस समय हैरान रह गई जब उसे बताया गया कि घायल महिला वकील को तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि आखिर आपातकालीन उपचार देने से इनकार क्यों किया गया? घायल अवस्था में महिला एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकती रही, जबकि हर पल उसकी जान पर बन रही थी। कोर्ट ने पुलिस को उन अस्पतालों के खिलाफ भी जांच करने और रिपोर्ट देने का आदेश दिया है जिन्होंने गंभीर स्थिति होने के बावजूद इलाज नहीं किया।

गायब बच्चियों को तलाशने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़े निर्देश

Delhi Police Update: अदालत में इस बात का भी खुलासा हुआ कि हमले के बाद आरोपी के परिवार वाले पीड़िता की दो छोटी बच्चियों (4 साल और 1 साल) को लेकर फरार हो गए हैं। वहीं 12 साल की बड़ी बेटी को रात में ही सड़क पर लावारिस छोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि गायब बच्चियों का तुरंत पता लगाया जाए। फिलहाल बड़ी बेटी को नानी-नाना के पास रखने का आदेश दिया गया है ताकि वह सुरक्षित महसूस कर सके।

जांच में निष्पक्षता के लिए महिला अधिकारी को कमान

न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। कोर्ट ने विशेष रूप से सुझाव दिया कि जांच की कमान एसीपी (ACP) या डीसीपी (DCP) स्तर की किसी महिला अधिकारी को दी जानी चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मुख्य आरोपी पति को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की तफ्तीश तेज कर दी है।

NALSA को आर्थिक मदद देने का आदेश और पीड़िता की बहादुरी

पीड़िता की गंभीर आर्थिक स्थिति और इलाज के खर्च को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) को तत्काल अंतरिम वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने पीड़िता की सराहना करते हुए उसे एक ‘बहादुर महिला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि महिला को सबसे पहले अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, बच्चों की सुरक्षा और कानूनी लड़ाई का जिम्मा अब प्रशासन का है। सुप्रीम कोर्ट वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।

एम्स में हालत स्थिर, इलाज जारी

ताजा अपडेट के अनुसार, पीड़िता को अंततः एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। वर्तमान में उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस की विशेष टीमें अब फरार ससुराल वालों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। यह मामला न केवल वकीलों की सुरक्षा बल्कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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