Delhi News: देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक बेहद चौंकाने वाली जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों, सरकारी बैंकों और नोएडा की एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े महाघोटाले की जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की गुहार लगाई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार को एक विशेष न्यायिक आयोग या उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
इस प्रस्तावित जांच समिति में भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआइ के शीर्ष अधिकारियों को शामिल करने का आग्रह किया गया है। इस कदम से देश के बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में हुआ संदिग्ध लेन-देन का भंडाफोड़
यह पूरी याचिका एक प्रतिष्ठित संस्था अर्न्स्ट एंड यंग की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई है। रिपोर्ट में सामने आए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता दावों के बाद जांच एजेंसियों को तुरंत सक्रिय करने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार, नोएडा की इस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने वर्ष 2012 से 2015 के बीच लोन लिया था। कंपनी ने एसबीआइ के नेतृत्व वाले सात प्रमुख बैंकों के समूह से करीब 912 करोड़ रुपये का भारी ऋण प्राप्त किया था।
शेल कंपनियों और फर्जी विक्रेताओं के जरिए किया बड़ा गबन
ऑडिट रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, लोन की कुल राशि में से करीब 902 करोड़ रुपये का बड़ा गबन किया गया था। इस भारी रकम को सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा कर बैंकिंग सिस्टम से पूरी तरह बाहर कर दिया गया।
आरोप है कि इस महाघोटाले को अंजाम देने के लिए शेल कंपनियों, फर्जी विक्रेताओं, अघोषित बैंक खातों और संदिग्ध कागजी लेन-देन का सहारा लिया गया था। मुजफ्फरनगर की प्रतीक्षा और दो अन्य लोगों ने यह जनहित याचिका दायर की है।
Author: Adv Anuradha Rajput


