ऊना में अवैध पेड़ कटान और तस्करी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और वन विभाग से मांगा विस्तृत जवाब

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Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऊना जिले की गगरेट तहसील में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई और वन उत्पाद तस्करी के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और वन विभाग से विस्तृत जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई की। अदालत ने ऊना के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की।

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वन जांच चौकी के औचक निरीक्षण के कड़े निर्देश

अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊना के सचिव को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वे संबंधित वन जांच चौकी का समय-समय पर औचक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र रूप से अपनी स्थिति रिपोर्ट सीधे अदालत में प्रस्तुत करेंगे।

यह पूरा मामला 8 मार्च 2026 को मिली एक लिखित शिकायत के बाद उजागर हुआ था। शिकायत में आरोप था कि गगरेट क्षेत्र से कीमती पेड़ों को काटकर ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है। शिकायतकर्ता ने सबूत के तौर पर जीपीएस टैग वाली कई तस्वीरें भी अदालत को सौंपी थीं।

तस्वीरों में दिखे ट्रकों को लेकर सरकार ने दी सफाई

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि गगरेट चौकी राष्ट्रीय राजमार्ग-3 पर स्थित एक वैध ट्रांजिट प्वाइंट है। सरकार के अनुसार जीपीएस तस्वीरों में दिख रहे वाहन अनुमत प्रजातियों की लकड़ियां लेकर जा रहे थे। इन 69 वाहनों के वैध परमिट की जांच के बाद ही इन्हें आगे जाने दिया गया।

हालांकि अदालत के सामने आए सरकारी रिकॉर्ड में एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली बात सामने आई है। कुल 149 वाहनों को अवैध परिवहन में शामिल पाया गया है। इनमें से अकेले अंब रेंज में 102 गाड़ियां बिना किसी वैध कागजात के वन उत्पाद ले जा रही थीं।

देहरा वन मंडल की टीम ने पकड़े 15 ट्रक

देहरा वन मंडल के कर्मचारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए अपने क्षेत्र में अवैध परिवहन में लगे 15 वाहनों को जब्त किया है। दूसरी तरफ सरकार ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता रोहित कटवाल ने जांच टीम से संपर्क करने के बाद भी जांच प्रक्रिया में कोई सहयोग नहीं किया।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान असंतोष जताते हुए कहा कि रिकॉर्ड में कोई ठोस विवरण मौजूद नहीं है। इससे राज्य से बाहर जा रहे वन उत्पाद के वास्तविक स्तर का पता नहीं चलता है। अदालत ने खैर के पेड़ों के अवैध कटान की नई रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर ले लिया है।

अदालत ने निर्देश दिया कि इस संवेदनशील क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से जुड़े एक पुराने जनहित याचिका मामले को भी इसी के साथ जोड़ा जाए। इसके साथ ही प्राधिकरण सचिव को शिकायतकर्ता से मिलकर स्वतंत्र जांच करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

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