Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा को लेकर दायर एक अहम याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा से जुड़ी सभी इंटरनेट सामग्री को सोशल मीडिया से हटाने की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
हालांकि अदालत ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पांच विशेष छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि राजनीतिक दलों के कामकाज और नीतियों पर व्यंग्य करना लोकतंत्र का हिस्सा है।
राजनीति में आलोचना और व्यंग्यात्मक मजाक लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन या नीतियों में बदलाव को लेकर मजाक बनाना स्वस्थ राजनीति का एक जरूरी तत्व है। जनता और विरोधी दलों के सदस्यों को राजनेताओं के कार्यों की आलोचना करने का पूरा हक है।
अदालत ने आगे कहा कि कभी-कभी यह तीखी आलोचना व्यंग्यात्मक मजाक के रूप में भी सामने आ सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नेता के सार्वजनिक कार्यों पर टिप्पणी को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता। हालांकि फर्जी और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट को हटाने के आदेश दिए गए हैं।

