महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में संग्राम: बहुमत से दूर एनडीए, क्या पास होगा बिल?

India News: संसद के विशेष सत्र में आज तीन बेहद अहम विधेयक पेश होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन को जल्द लागू करने की तैयारी में है। इसका मुख्य लक्ष्य आगामी चुनाव से पहले नया सिस्टम लागू करना है। इन बड़े प्रस्तावों के जरिए लोकसभा में सीटों की कुल संख्या काफी बढ़ाई जाएगी। निचले सदन की मौजूदा सीटें बढ़ाकर आठ सौ पचास करने का सीधा प्रस्ताव है।

दोनों सदनों में बहुमत का मुश्किल गणित

संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए। लोकसभा में इस बहुमत का आंकड़ा तीन सौ साठ है। सत्ताधारी एनडीए के पास सिर्फ दो सौ तिरानवे सांसद मौजूद हैं। ऐसे में सरकार को सड़सठ अतिरिक्त वोटों की सख्त जरूरत है। राज्यसभा में बहुमत के लिए एक सौ तिरसठ सीटें अनिवार्य हैं। वहां एनडीए के पास एक सौ बयालीस सदस्य हैं। उच्च सदन में भी सरकार को इक्कीस और वोटों की भारी दरकार है।

विपक्ष का परिसीमन पर कड़ा विरोध

विपक्षी दल महिला आरक्षण के पूरे समर्थन में खड़े हैं। लेकिन वे इसे परिसीमन से जोड़ने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि इससे क्षेत्रीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। उन्हें डर है कि नया परिसीमन केवल एनडीए को सीधा फायदा पहुंचाएगा। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की संसदीय शक्ति काफी कम हो जाएगी। वे राज्य देश की राजनीति में हाशिए पर चले जाएंगे।

राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना कड़ा एतराज जताया है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी सुविधा से सीमाएं बदलना चाहती है। यह योजना दो हजार उनतीस के चुनाव के लिए बनी है। उनका दावा है कि विधेयक सभी संवैधानिक सुरक्षा उपायों को खत्म करेगा। इससे परिसीमन आयोग को मनमानी करने की पूरी शक्ति मिल जाएगी।

लोकसभा सीटों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव

नए प्रस्तावित विधेयकों के तहत संसद की रूपरेखा पूरी तरह से बदल जाएगी। परिसीमन प्रक्रिया के बाद देश में लोकसभा सीटों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। यह आंकड़ा बढ़कर आठ सौ पंद्रह तक पहुंच सकता है। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी पैंतीस नई सीटें आरक्षित होंगी। वर्तमान व्यवस्था में राज्यों से पांच सौ तीस सदस्य चुनकर आते हैं। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों से केवल बीस सदस्य ही सदन पहुंचते हैं।

क्षेत्रीय दलों का बदला रुख और सरकार का दावा

बीजेडी और बीआरएस जैसे प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने अक्सर सरकार का साथ दिया है। लेकिन परिसीमन के इस संवेदनशील मुद्दे पर उनका रुख बेहद कड़ा है। क्षेत्रीय दलों के इस विरोध से सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। हालांकि सरकार को पूरा भरोसा है कि वह इस बाधा को पार कर लेगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी दल महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है।

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