हनुमान जी आज भी धरती पर कहां रहते हैं? सिंदूरी रंग के अलावा काले क्यों हुए बजरंगबली, जानिए रहस्य

Dharam News: संकटमोचन हनुमान जी के रहस्य और उनकी शक्तियां अनंत हैं। वे भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार हैं। माता अंजनी और केसरी के पुत्र हनुमान जी को पवनपुत्र भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बजरंगबली आज भी सशरीर धरती पर मौजूद हैं। वे अमर हैं और अष्टसिद्धि व नवनिधि के स्वामी हैं। कलयुग में भी हनुमान जी अपने भक्तों के संकट हर रहे हैं। आज हम आपको उनके सिंदूरी और काले रंग से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य बताएंगे जो शायद ही आप जानते होंगे।

गंधमादन पर्वत पर आज भी है निवास

हनुमान जी चिरंजीवी हैं। इसका मतलब है कि वे आज भी जीवित हैं। वे कलयुग के अंत तक इस पृथ्वी पर ही रहेंगे। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं। भगवान शिव ने विष्णु जी का मोहिनी रूप देखने के लिए अवतार लिया था। यही अवतार हनुमान जी के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हुआ।

अष्टसिद्धि और नवनिधि के हैं स्वामी

बजरंगबली अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता हैं। उनके पास कई अद्भुत शक्तियां मौजूद हैं। वे अणिमा सिद्धि से अपना आकार बहुत छोटा कर सकते हैं। महिमा सिद्धि से वे अपना शरीर विशाल बना सकते हैं। प्राप्ति सिद्धि की मदद से वे पल भर में कहीं भी आ-जा सकते हैं। वेदों के ज्ञाता हनुमान जी त्रेतायुग में रामभक्त बने। द्वापर युग में वे भीम के भाई बने। वहीं कलयुग में उन्होंने तुलसीदास जी का मार्गदर्शन किया।

पूरे शरीर पर क्यों लगाया सिंदूर?

हनुमान जी के शरीर पर सिंदूर चढ़ाने की एक रोचक कथा है। एक बार उन्होंने माता सीता को मांग में सिंदूर लगाते देखा। उन्होंने माता सीता से इसका कारण पूछा। सीता माता ने बताया कि इससे भगवान श्रीराम की उम्र बढ़ती है। यह सुनकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। वे चाहते थे कि उनके प्रभु राम की उम्र और भी ज्यादा बढ़ जाए।

राक्षसों के संहार के लिए लिया पंचमुखी रूप

हनुमान जी ने पांच दिशाओं में राक्षसों का वध करने के लिए विशेष रूप लिया। उन्होंने पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊपर की दिशा के लिए पंचमुखी रूप धारण किया। इस रूप में नृसिंह, गरुड़, वराह, हयग्रीव और हनुमान का मुख शामिल है। उनके इन रहस्यों को जानकर भक्तों की श्रद्धा काफी बढ़ जाती है।

हनुमान जी का रंग काला कैसे पड़ा?

ज्यादातर लोग हनुमान जी को सिंदूरी रंग में पूजते हैं। लेकिन भारत में काले हनुमान जी के भी कई प्राचीन मंदिर हैं। तेलंगाना, जयपुर और रायबरेली में इनकी विशेष पूजा होती है। एक कथा के अनुसार हनुमान जी शनिदेव को सूर्यदेव के पास ला रहे थे। तब शनिदेव की क्रोधित दृष्टि से हनुमान जी का रंग काला पड़ गया था। एक अन्य मान्यता भी है। श्रीराम ने समुद्र से रास्ता मांगने के लिए बाण ताना था। हनुमान जी उसे रोकने के लिए घुटने के बल बैठ गए थे। बाण की तेज ऊर्जा के कारण उनका रंग काला हो गया था।

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