भारतीय सेना में बड़ा फेरबदल: वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने संभाली सामरिक कमान, मेजर जनरल रेचल थॉमस बनीं MNS की नई बॉस!

Port Blair News: भारतीय सशस्त्र बलों में सोमवार को दो बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक और रणनीतिक नेतृत्व परिवर्तन हुए हैं। वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील अंडमान एवं निकोबार कमान (एएनसी) के 20वें कमांडर-इन-चीफ के रूप में 1 जून को श्री विजय पुरम में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है।

पदभार संभालने के बाद वाइस एडमिरल मैकार्टी ने कहा कि यह कमान भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाती है। उन्होंने तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के बीच आपसी तालमेल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कसम खाई।

36 वर्षों का लंबा और बेमिसाल सैन्य अनुभव

करीब 36 वर्षों का गौरवशाली सैन्य अनुभव रखने वाले वाइस एडमिरल मैकार्टी गनरी और मिसाइल प्रणाली के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 1 जुलाई 1989 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया था। वे स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस दिल्ली के कमीशनिंग दल का हिस्सा रहने के साथ ही कई बड़े युद्धपोतों की कमान संभाल चुके हैं।

उन्होंने अपने करियर में भारतीय नौसेना अकादमी के 10वें कमांडेंट और 2023 में पश्चिमी बेड़े के कमांडर के रूप में बेहतरीन सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने सिंगापुर और फिलीपींस में भारत के रक्षा सलाहकार के रूप में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अहम भूमिका निभाई है।

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में भी हुआ बड़ा बदलाव

इसी के साथ देश की सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में भी एक बड़ा और महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन देखा गया है। मेजर जनरल रेचल थॉमस ने 1 जून को सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) की अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) के रूप में पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना नया कार्यभार संभाल लिया है।

उन्होंने मेजर जनरल लिसम्मा पीवी का स्थान लिया है, जो 31 मई 2026 को लगभग चार दशकों की लंबी और सराहनीय देश सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुई हैं। मेजर जनरल रेचल थॉमस पुणे के प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की एक होनहार पूर्व छात्रा रही हैं।

अस्पतालों में निभाया चिकित्सीय और प्रशासनिक रोल

मेजर जनरल रेचल थॉमस को 1 जून 1988 को सैन्य नर्सिंग सेवा में आधिकारिक रूप से कमीशन मिला था। लगभग 38 वर्षों के अपने शानदार और लंबे करियर में उन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के अंतर्गत आने वाले देश के विभिन्न प्रमुख सैन्य अस्पतालों में क्लिनिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव दोनों जिम्मेदारियां बखूबी निभाई हैं।

Author: Harikarishan Sharma

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