New Delhi News: पश्चिम एशिया में भयंकर युद्ध छिड़ा हुआ है। इसका सीधा असर अब भारत पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में इस बड़े संकट की विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण एक बड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इससे भारत के अहम व्यापारिक मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। दूसरी तरफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी राजदूत से कूटनीतिक मुलाकात की है। भारत कूटनीति के जरिए लगातार शांति बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
राज्यसभा में पीएम मोदी ने जताई गहरी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा को संबोधित किया। उन्होंने पश्चिम एशिया के खूनी संघर्ष पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। पीएम मोदी ने कहा कि यह युद्ध भयंकर ऊर्जा संकट को जन्म दे रहा है। भारत पर भी इसका बहुत गहरा और सीधा प्रभाव पड़ रहा है। लगातार चल रहे इस संघर्ष से व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई बाधित हो रही है।
ईरान के राजदूत से मिले विदेश मंत्री जयशंकर
संकट को देखते हुए भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक अहम बैठक की। उन्होंने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली से सीधे मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष पर गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने मुश्किल समय में ईरान में रह रहे भारतीयों की मदद के लिए आभार भी जताया।
ईरानी राष्ट्रपति से पीएम मोदी की खास बातचीत
इससे पहले पिछले सप्ताह पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की थी। उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दी थीं। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी सहयोग पर लंबी चर्चा की। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह त्योहार क्षेत्र में शांति लाएगा। उन्होंने बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा भी की। ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं।
शांति के लिए भारत का कूटनीतिक अभियान जारी
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की अहमियत पर बहुत जोर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा डालना बिल्कुल गलत है। भारत ने व्यापारिक जहाजों और आम नागरिकों पर हमलों का विरोध किया है। मानव जीवन को खतरे में डालना सीधे तौर पर मानवता के खिलाफ है। भारत लगातार खाड़ी देशों, अमेरिका और इजरायल के संपर्क में बना हुआ है। सरकार का मकसद बातचीत के जरिए इलाके में शांति बहाल करना है।


