Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आपदा राहत के पैसों में भारी गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के इस्तेमाल में बड़ी अनियमितताएं मिली हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में कैग (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट बताती है कि साल 2019 से 2023 के बीच राहत फंड का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। वित्तीय प्रबंधन की कमी के कारण पीड़ितों को मदद मिलने में सालों की देरी हुई।
केंद्र सरकार ने क्यों रोके हिमाचल के करोड़ों रुपये?
विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। साल 2019-20 में फंड के गलत इस्तेमाल पर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया। केंद्र ने 258.30 करोड़ रुपये में से 61.07 करोड़ रुपये की भारी राशि रोक दी। इसके बावजूद प्रदेश में लगातार गड़बड़ियां होती रहीं। साल 2020-22 के बीच एसडीआरएफ खाते में करोड़ों रुपये बिना इस्तेमाल के पड़े रहे। इसके चलते एनडीआरएफ से 254.73 करोड़ रुपये जारी ही नहीं हो सके। गलत अनुमान भेजने पर केंद्र ने 61.02 करोड़ रुपये और काट लिए।
बचत खातों में रखा पैसा, सरकार को हुआ भारी नुकसान
नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने बड़ा आर्थिक नुकसान किया है। करीब 122.27 करोड़ रुपये की राशि को तय निवेश में नहीं लगाया गया। अधिकारियों ने यह सारा पैसा सामान्य बचत खातों में रख दिया। इससे सरकारी खजाने को ब्याज का भारी नुकसान उठाना पड़ा। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से इस नुकसान की कोई भरपाई नहीं की। कई मामलों में तो अधिकारियों ने तय मानकों से ज्यादा पैसा खर्च कर दिया। सरकार ने 11.76 करोड़ रुपये ऐसे कामों पर खर्च किए जो आपदा राहत में आते ही नहीं हैं।
आपदा पीड़ितों को राहत देने में लगा दिए 33 महीने
सिस्टम की लापरवाही के कारण आपदा पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार 90 मामलों में उपायुक्तों ने सहायता मंजूर करने में 11 से 33 महीने लगा दिए। राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को बिल्कुल अपडेट नहीं किया गया। कई जिलों में तो आपदा प्रबंधन दल तक नहीं बनाए गए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल में कर्मचारियों की भी भारी कमी है। स्वीकृत 326 पदों में से केवल 193 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। तकनीकी कर्मचारियों का बड़ा अभाव बना हुआ है।
धूल फांक रहे 6 करोड़ के उपकरण, वन विभाग में भी खेल
सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही उपकरणों की खरीद में भी साफ दिखी है। सरकार ने प्रशिक्षण और उपकरण खरीदने के लिए 6.07 करोड़ रुपये जारी किए। लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इन उपकरणों का कभी इस्तेमाल ही नहीं किया। मैनेजमेंट पोर्टल पर 9,449 स्वीकृत कार्यों को अपडेट नहीं किया गया। इससे राहत कार्यों की निगरानी पूरी तरह प्रभावित हुई। इसके अलावा वन विभाग में भी बड़ी अनियमितताएं मिली हैं। चंबा सर्कल में वन भूमि के वर्गीकरण में खेल हुआ। इससे सरकार को 21.33 करोड़ रुपये की कम वसूली का नुकसान हुआ है।


