आम जनता का कनेक्शन काटने वाला बिजली बोर्ड खस्ताहाल, सरकारी महकमे ही डकार गए 500 करोड़ रुपये!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। आम आदमी का बिजली बिल अगर थोड़ा भी लेट हो जाए, तो लाइनमैन तुरंत कनेक्शन काटने पहुंच जाता है। लेकिन खुद सरकारी विभाग बिजली बोर्ड का करोड़ों रुपये दबाकर बैठे हैं। विधानसभा सत्र में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और निगमों पर बिजली बोर्ड का 495.76 करोड़ रुपये बकाया है। यह कोई छोटी रकम नहीं है। भारी घाटे में चल रहा बिजली बोर्ड अब अपने ही विभागों से पैसे मांगने को मजबूर है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इस बात की लिखित जानकारी दी है।

जल शक्ति विभाग निकला सबसे बड़ा ‘डिफॉल्टर’

सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि एक ही महकमे ने सबसे ज्यादा पैसा दबा रखा है। यह विभाग जल शक्ति विभाग है। अकेले इसी विभाग पर बिजली बोर्ड का 455.91 करोड़ रुपये बकाया है। यह कुल बकाया राशि का 90 प्रतिशत से भी अधिक है। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस और लोक निर्माण विभाग भी इस लंबी सूची में शामिल हैं। नगर निगमों और स्थानीय कमेटियों ने भी 7.55 करोड़ रुपये का बिल नहीं चुकाया है। विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने विधानसभा में यह अहम सवाल उठाया था। इसके जवाब में सरकार ने 28 फरवरी 2026 तक के ये नए आंकड़े पेश किए हैं।

तीन साल से नहीं चुकाए 86 करोड़ रुपये

यह मामला सिर्फ कुछ महीनों की देरी का नहीं है। कई सरकारी विभागों ने तो सालों से बिल की शक्ल तक नहीं देखी है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 86.03 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम पिछले तीन साल से ज्यादा समय से लटकी हुई है। बिजली बोर्ड लगातार पत्राचार कर रहा है। लेकिन अधिकारियों पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा है। बोर्ड पहले ही बहुत बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों का यह सुस्त रवैया बोर्ड की कमर तोड़ रहा है।

अब सभी सरकारी दफ्तरों में लगेंगे ‘प्री-पेड मीटर’

सरकार ने अब इस भारी लापरवाही को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब बकाया वसूली के लिए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डिफॉल्टर विभागों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। कुछ जगहों पर ‘टेंपरेरी डिस्कनेक्शन’ की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सरकारी दफ्तरों में भी ‘प्री-पेड मीटर’ लगाए जाएंगे। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। यानी अब सरकारी विभागों को भी आम आदमी की तरह पहले रिचार्ज कराना होगा, तभी उनके दफ्तरों में बिजली जलेगी।

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