National News: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को हिला दिया है। शुक्रवार को बाजार की शुरुआत ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग के साथ हुई, जिससे निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स लगभग 553 अंक तक लुढ़क गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 100 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स 77,400 के करीब बना रहा।
दिग्गज बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण दिग्गज बैंकिंग और ऑटोमोबाइल शेयरों में होने वाली भारी बिकवाली है। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े नाम आज दबाव में नजर आ रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि, आईटी और फार्मा सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खरीदारी बाजार को पूरी तरह संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई भारत की चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में बढ़ी सैन्य तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को भड़का दिया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी हमलों को नाकाम करने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा नकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
निवेशकों के लिए आगे की राह और बाजार का रुख
बाजार के जानकारों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और छोटे निवेशक बाजार को सहारा दे रहे हैं। मिडकैप और पावर सेक्टर के शेयरों में अब भी मजबूती बनी हुई है। यदि खाड़ी देशों में तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार और रुपये को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल की चाल को देखते हुए बहुत सावधानी से निवेश करने की सलाह दी जाती है।


