India News: उत्तराखंड के रुद्रपुर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप जोमैटो पर दुकान का नाम बदलकर कारोबार करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ‘सौरभ चिकन बिरयानी’ के नाम से चल रही एक दुकान की वास्तविकता जब सामने आई, तो इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, जांच में पाया गया कि इस हिंदू नाम वाली दुकान का असली संचालक राशिद नाम का व्यक्ति है। इस खुलासे के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और पहचान छिपाकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
जोमैटो पर बिरयानी ऑर्डर करते ही युवक को हुआ संदेह
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रुद्रपुर के एक स्थानीय युवक ने जोमैटो के माध्यम से ‘सौरभ चिकन बिरयानी’ से भोजन मंगाया। त्रिशूल चौक क्षेत्र में इस नाम की किसी दुकान की जानकारी न होने के कारण युवक को संदेह हुआ। अपनी शंका दूर करने के लिए उसने अपने साथियों को बुलाया और स्वयं मौके पर जाकर जांच करने का निर्णय लिया। उन्होंने त्रिशूल चौक पर जोमैटो डिलीवरी राइडर का इंतजार किया ताकि दुकान के वास्तविक स्थान और संचालक की पहचान की जा सके।
त्रिशूल चौक पर जोमैटो राइडर को रोककर हुआ असली खुलासा
जैसे ही डिलीवरी ब्वॉय बिरयानी लेने के लिए संबंधित दुकान पर पहुंचा, युवकों ने उसे रोक लिया। मौके पर छानबीन करने पर पता चला कि दुकान का मालिक राशिद है, जिसने जोमैटो पर ‘सौरभ’ नाम से रजिस्ट्रेशन करवा रखा था। युवकों ने आरोप लगाया कि दुकानदार जानबूझकर हिंदू नाम का उपयोग कर रहा है ताकि लोग भ्रमित होकर वहां से ऑर्डर करें। इस दौरान युवकों और दुकानदार के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद वहां हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।
धार्मिक मान्यताओं और ‘हलाल’ मांस पर छिड़ा विवाद
हिंदू संगठनों का आरोप है कि राशिद ने पहचान छिपाकर न केवल लोगों को गुमराह किया, बल्कि उनकी धार्मिक मान्यताओं को भी ठेस पहुंचाई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज के लोग सौरभ नाम देखकर वहां से बिरयानी मंगवा रहे थे, जबकि उन्हें अनजाने में हलाल चिकन परोसा जा रहा था। उनका तर्क है कि खान-पान के मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को पहचान बदलकर धार्मिक भावनाओं से समझौता करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। विवाद बढ़ने पर पुलिस को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
भाजपा विधायक के नेतृत्व में एसपी क्राइम से की गई शिकायत
हंगामे के बाद मामला राजनीतिक गलियारे तक पहुंच गया। भाजपा विधायक शिव अरोड़ा के नेतृत्व में हिंदू संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल एसपी क्राइम से मिला और इस धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। विधायक ने कहा कि पहचान छिपाकर व्यापार करना और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस तरह के सभी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जांच करने का आग्रह किया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
उत्तराखंड में नाम को लेकर पहले भी हो चुके हैं विवाद
गौरतलब है कि उत्तराखंड में दुकानों और व्यापारिक संस्थानों के नाम को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में नेमप्लेट और असली मालिक की पहचान को लेकर कई बार हंगामा हो चुका है। प्रशासन अब जोमैटो और अन्य फूड एप्स के डेटा की जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ता को सही जानकारी मिल रही है या नहीं। रुद्रपुर की इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता और सुरक्षा के मुद्दे को गरमा दिया है।


