महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी का बड़ा बयान: ‘क्रेडिट की चिंता नहीं, विपक्ष चाहे तो ले ले ब्लैंक चेक’

India News: संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चल रही ऐतिहासिक चर्चा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और विपक्ष के साथ चल रहे ‘क्रेडिट’ विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एक राजनीतिक दल की जीत नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक सफलता का प्रतीक है।

विपक्ष को क्रेडिट के लिए ‘ब्लैंक चेक’ का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में विपक्ष द्वारा श्रेय लेने की होड़ पर तीखा प्रहार करते हुए एक उदार प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अगर बात सिर्फ राजनीतिक क्रेडिट की है, तो विपक्ष इसे सहर्ष स्वीकार कर सकता है। पीएम ने यहां तक कहा कि वह क्रेडिट के लिए विपक्ष को ‘ब्लैंक चेक’ देने को तैयार हैं और सरकार विज्ञापनों में विपक्षी नेताओं की तस्वीरें लगाने से भी पीछे नहीं हटेगी। उनका जोर इस बात पर था कि प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़े।

राष्ट्रहित को राजनीतिक लाभ से ऊपर रखने की अपील

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि महिला आरक्षण बिल से उनकी सरकार को निश्चित रूप से राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रहित किसी भी चुनावी लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह विधेयक पिछले तीन दशकों से लंबित पड़ा था। यदि अब भी इसे लागू करने में देरी की गई, तो इसका खामियाजा न केवल राजनीतिक दलों को, बल्कि पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।

देश की अखंडता और उत्तर-दक्षिण विभाजन पर कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच परिसीमन को लेकर पैदा किए जा रहे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि संविधान ने किसी को भी देश को ‘टुकड़े-टुकड़े’ में बांटने का अधिकार नहीं दिया है। हमें एक राष्ट्र के रूप में सोचना चाहिए और क्षेत्रीय राजनीति के आधार पर राष्ट्रीय निर्णयों को प्रभावित नहीं करना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।

सबका साथ-सबका विकास और ओबीसी पृष्ठभूमि का जिक्र

पीएम मोदी ने अपनी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही वह स्वयं ओबीसी समुदाय से आते हैं, लेकिन उनका प्राथमिक धर्म ‘सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित करना है। उन्होंने विपक्ष के ‘गारंटी’ जैसे शब्दों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है, तो शब्दों के खेल की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा में साथ लेकर चलने के लिए संकल्पित हैं।

महिला बुद्धिमत्ता पर भरोसा और कोटे के भीतर कोटा

कोटे के भीतर कोटे (सब-कोटा) की मांग पर प्रधानमंत्री ने एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे देश की महिलाओं की बुद्धिमत्ता और विवेक पर अटूट भरोसा रखें। मोदी ने तर्क दिया कि पहले 33 प्रतिशत महिलाओं को संसद में प्रवेश करने का अवसर मिलना चाहिए। उसके बाद, महिला जनप्रतिनिधि स्वयं यह तय करने में सक्षम होंगी कि उनके भीतर किन वर्गों को प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है और उसे कैसे लागू करना है।

30 साल के लंबे इंतजार को खत्म करने का आह्वान

महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले 25 से 30 वर्षों से भारतीय राजनीति में एक अधूरा अध्याय बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि अब इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और यह कानून हमारी विधायी प्रक्रिया को अधिक मानवीय बनाएगा। पीएम ने सदन से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर नया इतिहास रचने का अनुरोध किया।

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