IIT BHU Food Waste Management: आईआईटी बीएचयू हॉस्टलों में अब नहीं बर्बाद होगा खाना, जरूरतमंदों का पेट भरने के साथ पशुओं को मिलेगा चारा

Varanasi News: देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बीएचयू ने बचे हुए भोजन के सही इस्तेमाल के लिए एक बेहद अनोखी और सराहनीय पहल शुरू की है। संस्थान अब अपने हॉस्टलों से निकलने वाले अतिरिक्त भोजन को कचरे में फेंकने के बजाय सीधे जरूरतमंद लोगों तक सुरक्षित पहुंचा रहा है।

इस अनूठी मुहिम का मुख्य उद्देश्य पूरे कैंपस में बेहतर साफ-सफाई व्यवस्था बनाए रखना है। इसके साथ ही संस्थान बड़े पैमाने पर होने वाले फूड वेस्ट को कम कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहा है। इस कदम से पर्यावरण संरक्षण को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है।

दिन में तीन बार कलेक्ट हो रहा है हॉस्टलों का खाना

आईआईटी बीएचयू परिसर में इस समय कुल 12 बॉयज हॉस्टल और 4 गर्ल्स हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। इन सभी 16 हॉस्टलों में रहने वाले करीब 8500 छात्र-छात्राओं के लिए रोजाना तीन वक्त का नाश्ता, लंच और डिनर बेहद बड़े स्तर पर तैयार किया जाता है।

काउंसिल ऑफ वार्डन्स के चेयरमैन प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह इस पूरी व्यवस्था का खुद नेतृत्व कर रहे हैं। उनके दिशा-निर्देश पर सभी हॉस्टलों की मेस से दिन में तीन बार बचा हुआ खाना और खाद्य अपशिष्ट बहुत व्यवस्थित तरीके से कलेक्ट किया जा रहा है।

संस्थान ने इस काम की जिम्मेदारी एक अधिकृत और पेशेवर एजेंसी को सौंपी है। यह एजेंसी पूरी मुस्तैदी से सभी हॉस्टलों से खाद्य अपशिष्ट एकत्र करती है। प्लेटों में बचा हुआ खाना पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल के लिए तुरंत भेज दिया जाता है।

आसपास के वंचित इलाकों में बांटा जा रहा सुरक्षित भोजन

हॉस्टल की रसोइयों में बचने वाला अतिरिक्त और पूरी तरह से शुद्ध भोजन सीधे जरूरतमंद लोगों की थाली तक पहुंच रहा है। संस्थान इस सुरक्षित भोजन को चित्तूपुर, सीर गोवर्धन और बीएचयू बाईपास के आसपास रहने वाले गरीब और वंचित परिवारों में बांट रहा है।

आईआईटी बीएचयू का यह शानदार ‘वेस्ट टू वेलफेयर’ मॉडल अब पूरे देश के लिए एक बेहतरीन नजीर बन रहा है। संस्थान सतत विकास, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति हमेशा समर्पित है। यह नई व्यवस्था दूसरे बड़े संस्थानों को भी प्रेरित करेगी।

Author: Ajay Mishra

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