Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का बेसब्री से इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है। इस बड़े फैसले के बाद ही राज्य में चुनाव का रास्ता साफ हो पाएगा।
कैबिनेट बैठक में नए ओबीसी आयोग को हरी झंडी मिलने की पूरी उम्मीद है। यह नया आयोग ही उत्तर प्रदेश के आगामी पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की स्थिति तय करेगा। सरकार के इस कदम से ग्रामीण राजनीति में काफी लंबे समय से जारी अनिश्चितता का माहौल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
जानिए आखिर कब होगी उत्तर प्रदेश में पंचायत वोटिंग
कानूनी और तकनीकी पेच के कारण आगामी 26 मई तक पंचायत चुनाव कराना अब मुमकिन नहीं है। जानकारों के मुताबिक सरकार के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं। प्रशासन या तो मॉनसून के बाद अक्टूबर-नवंबर में मतदान कराएगा या फिर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के ठीक बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी।
नया ओबीसी आयोग उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों का खुद दौरा करेगा। आयोग वहां स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठकें करके जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा करेगा। इस पूरी जटिल प्रक्रिया को पूरा करके अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार करने में आयोग को कम से कम चार से पांच महीने लगेंगे।
मॉनसून और खेती के कारण टल सकती है चुनावी तारीख
आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार आम जनता और राजनीतिक दलों से आपत्तियां मांगेगी। इन शिकायतों के निपटारे में भी एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद जून से प्रदेश में मॉनसून दस्तक दे देगा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में धान की बुवाई का काम तेजी से शुरू हो जाता है, जिससे वोटिंग कराना कठिन होगा।
अक्टूबर और नवंबर का महीना चुनावी लिहाज से काफी संवेदनशील रहेगा क्योंकि इसके ठीक चार महीने बाद ही राज्य में मुख्य विधानसभा चुनाव होने हैं। गांवों के स्थानीय चुनावों में अक्सर भारी गुटबाजी और आपसी टकराव देखने को मिलता है। इस वजह से मुख्य चुनाव से ठीक पहले सरकार कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहती।
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद जागी राज्य सरकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को तुरंत ओबीसी आयोग गठित करने का आदेश दिया था। कोर्ट में दायर एक याचिका में तय समय पर ही चुनाव कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बार-बार चुनाव टालकर प्रशासक नियुक्त करना पूरी तरह से असंवैधानिक कदम है।
राज्य निर्वाचन आयोग, लखनऊ ने अंतिम मतदाता सूची तैयार करने के लिए 10 जून तक की आखिरी तारीख तय की है। वोटर लिस्ट फाइनल न होना भी देरी का बड़ा कारण है। इस बार कई ग्रामीण इलाके शहरी सीमा में शामिल हो चुके हैं। इस बड़े बदलाव के कारण ग्राम पंचायतों की कुल संख्या में कमी आएगी।
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों का पूरा गणित समझें
उत्तर प्रदेश का पंचायती राज ढांचा पूरे देश में जमीनी लोकतंत्र का सबसे बड़ा नेटवर्क माना जाता है। वर्तमान सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय यूपी में कुल 57,695 ग्राम पंचायतें सक्रिय हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास को गति देने के लिए राज्यभर में कुल 826 ब्लॉक पंचायतें काम कर रही हैं।
जिला स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी के लिए सभी 75 जिलों में जिला पंचायतें मौजूद हैं। इन आगामी चुनावों के जरिए ही इन सभी सीटों के उम्मीदवारों के भाग्य का अंतिम फैसला होना है। फिलहाल करोड़ों ग्रामीण मतदाता अब कैबिनेट के फैसले और निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर नजरें टिकाए बैठे हैं।
Author: Ajay Mishra

