Jammu and Kashmir News: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में कई चौंकाने वाले वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं. इन नए और पुख्ता सबूतों से इस कायराना हमले का सीधा पाकिस्तान कनेक्शन पूरी तरह उजागर हो गया है. फोरेंसिक टीम को आतंकियों के मोबाइल से बेहद महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा मिला है.
सुरक्षा एजेंसियों की फोरेंसिक जांच में पता चला है कि आतंकियों के स्मार्टफोन्स में खूबसूरत बायसरन घाटी की सटीक भौगोलिक लोकेशन पहले से रिकॉर्ड थी. इसके साथ ही फोन मैमोरी में इलाके के कई डिजिटल स्क्रीनशॉट्स भी मिले हैं. इस खुलासे से साफ है कि आतंकियों ने सुनियोजित साजिश रची थी.
कराची और लाहौर के पते पर डिलीवर हुए थे दो चीनी मोबाइल
एनआईए को आतंकियों के पास से दो चीनी कंपनियों के हाई-टेक मोबाइल फोन बरामद हुए थे. जब जांच एजेंसी ने इन डिवाइस के इंटरनेशनल सप्लाई चेन रिकॉर्ड को बारीकी से खंगाला, तो बेहद हैरान करने वाली जानकारी सामने आई. ये दोनों संदिग्ध मोबाइल सीधे पाकिस्तान भेजे गए थे.
रिकॉर्ड के अनुसार ये फोन पहले पाकिस्तान के कराची और लाहौर के रिहायशी एड्रेस पर डिलीवर किए गए थे. वहां से इन्हें कश्मीरी सीमा के रास्ते आतंकियों तक पहुंचाया गया था. एनआईए अब घाटी में सक्रिय उस भूमिगत स्लीपर सेल नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है.
चीन के रास्ते लश्कर आतंकियों तक पहुंचा अमेरिकी गोप्रो कैमरा
इस बड़े टेरर ऑपरेशन में आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किया गया अमेरिकी कंपनी का एक ‘GoPro’ कैमरा भी बरामद हुआ है. सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह आधुनिक कैमरा चीन के सीक्रेट रूट से प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकियों तक सुरक्षित पहुंचाया गया था.
इस कैमरे की पूरी खरीद और ग्लोबल सप्लाई चेन को ट्रैक करने के लिए एनआईए ने अमेरिकी कंपनी से सीधा संपर्क साधा है. इस इंटरनेशनल चैनल का पर्दाफाश होने से आतंकियों को मिलने वाले विदेशी फंड, आधुनिक हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट की रीढ़ तोड़ी जा सकेगी.
लश्कर कमांडर साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा है हमले का मास्टरमाइंड
एनआईए द्वारा विशेष अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में इस पूरे खूनी खेल का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ लंगड़ा को बनाया गया है. वह वर्तमान में पाकिस्तान के लाहौर के पास कसूर इलाके में छिपकर रह रहा है.
वह सीमा पार से डिजिटल ऐप के जरिए तीनों स्थानीय आतंकियों से रियल टाइम में लगातार संपर्क में था. उसी ने घाटी की जियोग्राफिकल लोकेशन भेजकर हमले का लाइव निर्देश दिया था. ये सभी डिजिटल फॉरेंसिक सबूत अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को पूरी तरह बेनकाब करते हैं.
स्थानीय टूरिस्ट गाइडों ने आतंकियों को दी थी खुफिया पनाह
जांच एजेंसी ने स्थानीय स्तर पर आतंकियों की मदद करने वाले मददगारों पर भी कड़ा शिकंजा कसा है. चार्जशीट के अनुसार स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार ने हमले से ठीक एक दिन पहले आतंकियों को अपने ठिकाने पर देखा था.
इन दोनों गाइडों ने आतंकियों को अपनी झोपड़ी में छिपाकर रात का खाना भी खिलाया था. इसके बावजूद उन्होंने देश की सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी. पुलिस अब इन देशद्रोहियों के पुराने रिकॉर्ड और बैंक खातों की गहनता से पड़ताल कर रही है.
Author: Raj Thakur


