Maharashtra News: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस कंपनी के कथित धर्मांतरण मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। नासिक क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम ने मुख्य आरोपी एचआर एग्जीक्यूटिव निदा खान को पकड़ लिया है। वह पिछले बीस दिनों से पुलिस को लगातार चकमा दे रही थी। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुलिस ने उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया। इस बड़ी गिरफ्तारी से अब मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
पच्चीस मार्च को दर्ज हुई थी पहली एफआईआर
इस विवादित मामले की शुरुआत पच्चीस मार्च को हुई थी। टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में धर्मांतरण का आरोप लगने से हड़कंप मच गया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसी दिन पहली एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सात अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन मुख्य आरोपी निदा खान उसी दिन से फरार हो गई थी। पुलिस की तीन से चार विशेष टीमें उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थीं।
मेडिकल सर्टिफिकेट का लिया था सहारा
फरार रहने के दौरान निदा खान ने पुलिस से बचने के कई प्रयास किए। उसने खुद को गर्भवती बताते हुए एक डॉक्टर से मेडिकल सर्टिफिकेट भी बनवाया था। इस सर्टिफिकेट में उसे आराम करने की सलाह दी गई थी। निदा ने इसी आधार पर अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। पिछले सप्ताह अदालत ने इस जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पुणे और मुंबई के मुंब्रा में छापेमारी की।
अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े होने का शक
अधिकारियों के मुताबिक यह केवल दो लोगों का साधारण विवाद नहीं है। इस मामले में विदेशी फंडिंग और एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के शामिल होने का शक है। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत अविवाहित युवती के साथ यह बहुत गंभीर अपराध है। इसमें यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, जातिगत प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण की एक सुनियोजित साजिश शामिल है। अदालत ने भी माना है कि आरोपी से पुलिस हिरासत में कड़ी पूछताछ करना बहुत जरूरी है।
एसआईटी कर रही है मामले की गहन जांच
नासिक पुलिस की एसआईटी इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए काम कर रही है। निदा खान की गिरफ्तारी के बाद विदेशी नेटवर्क के कई राज बेनकाब हो सकते हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य स्लीपर सेल की भी तलाश कर रही है। देश की इतनी बड़ी आईटी कंपनी में ऐसा सिंडिकेट चलना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। पुलिस हिरासत के दौरान मामले से जुड़े कई सफेदपोश लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।


