Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों ने ग्रामीण राजनीति की एक बिल्कुल नई और दिलचस्प तस्वीर पेश की है। इस बार राज्य के गांवों में बदलाव की बड़ी लहर देखी गई है। चुनाव परिणामों से साफ है कि युवाओं, महिलाओं और उच्च शिक्षित उम्मीदवारों ने इस बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार कुल 29,483 उम्मीदवार अपनी किस्मत चमकाने में सफल रहे हैं। इन विजेताओं में जहां बड़ी संख्या अमीर उम्मीदवारों की है, वहीं 2,062 ऐसे उम्मीदवार भी जीते हैं जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करते हैं। यह लोकतंत्र की बेहद खूबसूरत और मजबूत तस्वीर दिखाता है।
ग्रामीण सरकार में पढ़े-लिखे युवाओं का जबरदस्त दबदबा
इस बार के चुनावी समर में 31 से 50 वर्ष की उम्र वाले उम्मीदवारों का सबसे ज्यादा दबदबा देखने को मिला है। इस आयु वर्ग के कुल 19,577 प्रत्याशी चुनाव जीतकर सामने आए हैं। यह संख्या कुल विजेता उम्मीदवारों का लगभग 66 फीसदी है, जो अनुभव और युवा ऊर्जा का बेहतरीन संतुलन है।
अगर शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधि कम से कम मैट्रिक या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूर्ण साक्षर राज्य होने के बावजूद करीब 429 उम्मीदवार ऐसे भी चुने गए हैं, जो पूरी तरह से अनपढ़ बताए गए हैं।
चुनावी रण में आधी आबादी ने मारी बाजी
हिमाचल प्रदेश के इन चुनावों में महिला शक्ति का असर पुरुषों के मुकाबले काफी ज्यादा देखने को मिला है। कुल नामांकन दाखिल करने में महिलाओं की हिस्सेदारी भले ही 43.85 फीसदी थी, लेकिन जब नतीजे आए तो बाजी पूरी तरह पलट गई। अब ग्रामीण सरकार में महिलाओं का दबदबा बढ़ गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार विजेता उम्मीदवारों में महिलाओं का कुल प्रतिशत 53.89 दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि कुल 15,887 महिलाएं अब विभिन्न पंचायतों में नेतृत्व संभालेंगी। यह ऐतिहासिक आंकड़े साबित करते हैं कि आधी आबादी अब गांवों के विकास की मुख्य धारा में सबसे आगे आ चुकी है।
Author: Sunita Gupta

