कर्नाटक में बड़ा सियासी उलटफेर, सिद्धारमैया का इस्तीफा, जानिए क्यों डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस खेल रही है मास्टरस्ट्रोक

Karnataka News: कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री एस सिद्धारमैया ने करीब तीन साल बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब राज्य को जल्द नया मुख्यमंत्री मिलेगा। नए नाम का औपचारिक ऐलान होना अभी बाकी है। हालांकि, हालिया तस्वीरों से साफ संकेत मिल रहा है कि डीके शिवकुमार ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने सभी मंत्रियों को ब्रेकफास्ट पर बुलाया था। इसी बैठक में उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी सबको दी। इस दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और उन्हें गले लगाया। यह तस्वीर बताती है कि सत्ता परिवर्तन शांति और सहमति से हो रहा है। पार्टी में कोई फूट या आपसी मतभेद बिल्कुल नहीं है।

डीके शिवकुमार का सिद्धारमैया के पैर छूना सिर्फ सम्मान नहीं है। यह पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश देने की बड़ी कोशिश है। इस बदलाव में सिद्धारमैया की पूरी सहमति है। साथ ही शिवकुमार को उनका पूरा आशीर्वाद भी प्राप्त है। यह कदम सिद्धारमैया के नाराज समर्थकों को शांत करने और साधने का एक बेहद अहम प्रयास माना जा रहा है।

राज्यपाल के सचिव को सिद्धारमैया ने सौंपा अपना इस्तीफा

सिद्धारमैया ने करीब तीन बजे एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि हाईकमान के निर्देश पर उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत के सचिव को सौंप दिया है। राज्यपाल फिलहाल कुछ पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर हैं। इस खास प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उन्होंने अपना पुराना वादा निभाया है। आलाकमान के कहने पर उन्होंने तुरंत मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। उन्हें पूरा विश्वास है कि राज्यपाल संवैधानिक नियमों के तहत इस्तीफा स्वीकार करेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा जाने का बड़ा प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने दिल्ली जाने से मना कर दिया और राज्य की राजनीति चुनी।

इस्तीफे के लिए सिद्धारमैया ने रखीं कुछ खास शर्तें

सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने आसानी से पद नहीं छोड़ा है। राहुल गांधी के विशेष आग्रह पर वह इसके लिए तैयार हुए। उन्होंने प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला के सामने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। इसके बाद सुरजेवाला ने उन्हें बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया है। अब सिद्धारमैया और रणदीप सुरजेवाला दिल्ली जाकर सीधे राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले हैं।

सिद्धारमैया चाहते हैं कि उनके करीबी मंत्रियों को पद पर बरकरार रखा जाए। उनके महत्वपूर्ण विभागों में कोई बदलाव ना किया जाए। इसके साथ ही उनके एमएलसी बेटे के राजनीतिक भविष्य का पूरा ख्याल रखा जाए। आलाकमान उन्हें अच्छे विभाग देकर कैबिनेट मंत्री बनाने को पहले ही तैयार है। अब प्रदेश अध्यक्ष का पद उनके समर्थक को दिया जा सकता है।

सिद्धारमैया की एक और अहम शर्त डिप्टी सीएम पद को लेकर है। वह चाहते हैं कि नए डिप्टी सीएम के चुनाव में उनकी राय मानी जाए। पार्टी उन्हें दक्षिण भारत में एक बड़े ओबीसी चेहरे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। इसीलिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में भी किसी बड़े पद का खास ऑफर दिया गया है।

कांग्रेस के सत्ता परिवर्तन पर बीजेपी ने कसा तंज

इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर विपक्षी दल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। साल 2028 के चुनाव में कांग्रेस की हार एकदम निश्चित है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि कांग्रेस में यह सब केवल सत्ता पाने के लिए हो रहा है।

बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने भी कांग्रेस पार्टी पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस देश में बचेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। दक्षिण भारत के तीन अहम राज्यों में फिलहाल कांग्रेस की सरकार चल रही है। इनमें से कर्नाटक राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और बड़ा राज्य माना जाता है।

सामाजिक समीकरण साधने के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव

कांग्रेस पार्टी दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। वह अभी से अपना राजनीतिक गणित मजबूत करना चाहती है। इसीलिए 78 साल के सिद्धारमैया को हटाकर शिवकुमार को चुना गया है। कर्नाटक का यह सत्ता परिवर्तन सिर्फ दो चेहरों का साधारण बदलाव नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी का एक बहुत बड़ा सोशल इंजीनियरिंग दांव है।

कर्नाटक की 224 सीटों का फैसला मुख्य रूप से पांच वोट बैंक करते हैं। राज्य में लिंगायत मतदाता करीब 17 प्रतिशत हैं, जो बीजेपी के समर्थक हैं। वोक्कालिगा समुदाय 15 प्रतिशत है, जिसका ओल्ड मैसूर क्षेत्र में काफी दबदबा है। मुस्लिम मतदाता 13 प्रतिशत हैं, जो तटीय क्षेत्रों में अहम हैं। वहीं, कुरुबा समुदाय के लोग आठ प्रतिशत के करीब हैं।

राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 17 प्रतिशत और जनजाति की 7 प्रतिशत है। ये दोनों समुदाय पूरे कर्नाटक में फैले हैं और कांग्रेस के समर्थक हैं। सिद्धारमैया ने अहिंदा वोट बैंक का एक बहुत ही मजबूत और सफल समीकरण बनाया था। इसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदाय पूरी तरह से एक साथ जुड़े हुए माने जाते हैं।

वोक्कालिगा वोटों पर कांग्रेस पार्टी की है खास नजर

अहिंदा वर्ग मिलकर राज्य के 40 प्रतिशत से अधिक वोटों को प्रभावित करता है। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि सिद्धारमैया को हटाने से कुरुबा वर्ग नाराज हो। इसीलिए सत्ता परिवर्तन की यह प्रक्रिया बहुत शांति और आपसी सहमति से की गई है। अब कांग्रेस सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के प्रभाव को मिलाकर नया सत्ता संतुलन बनाना चाहती है।

पार्टी जानती है कि कर्नाटक में सिर्फ अहिंदा वोट बैंक ही काफी नहीं है। दक्षिण कर्नाटक के वोक्कालिगा वोटों पर पकड़ मजबूत करना भी बहुत जरूरी है। इसलिए वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया। ओल्ड मैसूर क्षेत्र की करीब 65 सीटों पर यह समुदाय चुनाव नतीजे तय करता है।

पिछले तीन दशकों से इस क्षेत्र में देवगौड़ा परिवार और जेडीएस का दबदबा है। कांग्रेस चाहती है कि वोक्कालिगा समुदाय का बड़ा हिस्सा सीधे उसके साथ जुड़ जाए। कांग्रेस की रणनीति बीजेपी और जेडीएस गठबंधन की सबसे मजबूत कड़ी को तोड़ना है। इस नए दांव से कांग्रेस दक्षिण कर्नाटक में अपनी राजनीतिक पकड़ काफी मजबूत कर लेगी।

डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस के लिए फायदेमंद

डीके शिवकुमार गांधी परिवार के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी रणनीति के कारण ही कांग्रेस जीती थी। शिवकुमार को कांग्रेस का एक बेहतरीन रणनीतिकार और शानदार संकटमोचक माना जाता है। उनके मुख्यमंत्री बनने से राज्य सरकार की कार्यशैली में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

आलाकमान के लिए वह हमेशा से संगठन और वित्तीय संसाधनों के मजबूत स्तंभ रहे हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी का प्रदेश संगठन भविष्य में और ज्यादा मजबूत हो जाएगा। शिवकुमार वोक्कालिगा बाहुल्य ओल्ड मैसूर क्षेत्र में बीजेपी और जेडीएस का गठजोड़ तोड़ सकते हैं। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सिद्धारमैया खेमे को पूरी तरह संतुष्ट रखना होगी।

शिवकुमार को अहिंदा और कुरुबा वोट बैंक को भी साधे रखने का काम करना होगा। वह पहले भी चुनाव के दौरान अपना बेहतरीन मैनेजमेंट सबको दिखा चुके हैं। कर्नाटक में चुनाव के नतीजे तय करने में वोक्कालिगा समुदाय की हमेशा अहम भूमिका रही है। डीके शिवकुमार इस ताकतवर समुदाय से आने वाले राज्य के आठवें मुख्यमंत्री बन जाएंगे।

अहिंदा कर्नाटक की राजनीति का एक सबसे बड़ा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण माना जाता है। इसमें अंग्रेजी के अक्षर ए का मतलब अल्पसंख्यक समुदाय से होता है। वहीं एचआई का अर्थ हिंदुलिदव है, जो कन्नड़ भाषा का एक शब्द है। इसका सीधा मतलब राज्य के बड़े हिंदू पिछड़ा वर्ग से है।

इस समीकरण में शामिल डीए का अर्थ सीधे तौर पर दलित समुदाय से होता है। यह समीकरण बिल्कुल उत्तर भारत की राजनीति में दिखने वाले पीडीए की तरह है। पीडीए के जरिए भी मुख्य रूप से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को जोड़ा जाता है। कांग्रेस इस मॉडल को पूरी तरह सफल मानती है।

ओल्ड मैसूर रीजन की करीब साठ से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस की विशेष नजर है। इस पूरे इलाके में वोक्कालिगा मतदाता ही सत्ता का अंतिम फैसला करते हैं। पिछले तीस सालों से इस पूरे क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के परिवार का ही एकतरफा राजनीतिक दबदबा कायम रहा है।

गठबंधन को कमजोर करने की ठोस और स्पष्ट रणनीति

डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस इसी वोक्कालिगा वोट बैंक को साधना चाहती है। यह जेडीएस के सबसे मजबूत गढ़ में बड़ी सेंध लगाने की एक स्पष्ट और सोची समझी राजनीतिक रणनीति है। पार्टी किसी भी हाल में दक्षिण कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस के नए गठबंधन को पूरी तरह रोकना चाहती है।

कांग्रेस आलाकमान ने संगठन को हर स्तर पर मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। शिवकुमार के पास आक्रामक प्रशासक की छवि है, जो चुनाव में काफी काम आएगी। साल 2023 की ऐतिहासिक जीत में उनका बहुत बड़ा और निर्णायक योगदान रहा था। इसके बावजूद उन्हें सीएम बनने के लिए तीन वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा।

सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद छोड़ना कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। पार्टी के सामने सिद्धारमैया और शिवकुमार के समर्थकों के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने की सबसे अहम चुनौती होगी। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव उसे अगले विधानसभा चुनाव में भारी लाभ दिलाएगा।

Author: Suresh Gowda

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories