Tamil Nadu News: दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के सबसे चर्चित और कद्दावर नेता के. अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई और दिल्ली हाईकमान के बीच दूरियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अन्नामलाई ने कर्नाटक कैडर में एक सख्त पुलिस अफसर के रूप में पहचान बनाई थी। साल 2019 में नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अगस्त 2020 में भाजपा का दामन थामा। पार्टी ने उनके आक्रामक तेवरों को देखते हुए रिकॉर्ड समय में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था।
एक साल में ही बने प्रदेश अध्यक्ष, यात्रा से चमके
राजनीति में आने के महज एक साल के भीतर ही अन्नामलाई का कद आसमान छूने लगा। उन्होंने अपनी बहुचर्चित ‘एन मन्न, एन मक्कल’ यात्रा के जरिए पूरे तमिलनाडु का दौरा किया। इस यात्रा ने उन्हें हर घर में पहचान दिलाई और पीएम मोदी ने भी उनकी खूब तारीफ की थी।
अन्नामलाई हमेशा भाजपा को राज्य में एक स्वतंत्र और मजबूत ताकत के रूप में देखना चाहते थे। इसी रणनीति के तहत उन्होंने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ-साथ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) पर भी तीखे राजनीतिक हमले जारी रखे, जिससे राज्य का सियासी समीकरण बदल गया।
एआईएडीएमके से दोबारा गठबंधन बना सबसे बड़ा विवाद
अन्नामलाई के कड़े रुख के कारण साल 2023 में भाजपा और एआईएडीएमके का पुराना गठबंधन पूरी तरह टूट गया। लेकिन साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मनमुताबिक सीटें नहीं मिलीं। इसके बाद दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदल दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल 2025 में एआईएडीएमके के साथ दोबारा नए गठबंधन का बड़ा एलान कर दिया। दिल्ली हाईकमान ने यह भी साफ कर दिया कि इस गठबंधन का नेतृत्व पलानीस्वामी करेंगे। पार्टी का यही फैसला अन्नामलाई को मानसिक रूप से बिल्कुल मंजूर नहीं था।
अध्यक्ष पद छिना और टिकट भी नहीं मिला
गठबंधन के इस नए समझौते के बाद अन्नामलाई को अचानक प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। उनकी जगह नैनार नागेंद्रन को कमान सौंपी गई। इसके बाद उन्हें साल 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से उम्मीदवार भी नहीं बनाया गया, जिससे दूरियां और बढ़ गईं।
हाल के दिनों में अन्नामलाई ने केंद्र सरकार की भाषा नीति पर भी खुलकर अपनी अलग राय रखी। तमिलनाडु की संवेदनशील राजनीति को देखते हुए उनके इस कदम को बगावत के तौर पर देखा गया। विश्लेषकों के मुताबिक वे भाजपा से इतर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने में जुटे हैं।
चेन्नई में लगे पोस्टरों ने बढ़ाई दिल्ली की धड़कन
चेन्नई में अन्नामलाई के जन्मदिन से ठीक पहले समर्थकों ने कई भावुक पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों पर उन्हें वापस आकर नया नेतृत्व संभालने की अपील की गई है। इस घटना के बाद उनके भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने की अफवाहें अब बेहद तेज हो गई हैं।
जब पत्रकारों ने अन्नामलाई से नई पार्टी के गठन को लेकर सीधा सवाल पूछा, तो उन्होंने इसका खंडन नहीं किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे कुछ ही दिनों में इस पूरे विषय पर विस्तार से बात करेंगे। उनके इस जवाब ने सस्पेंस को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
अभिनेता विजय की नई पार्टी की सफलता ने साबित किया है कि तमिलनाडु में तीसरे विकल्प के लिए भरपूर जगह है। अगर अन्नामलाई भाजपा का साथ छोड़कर नया मंच तैयार करते हैं, तो यह दक्षिण भारत में भाजपा के विस्तार प्लान के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा।
Author: Karthik Srinivasan


