Himachal News: मंडी जिले के गोहर उपमंडल में पीलिया ने खौफनाक रूप अख्तियार कर लिया है। प्रशासन की सुस्ती और दूषित पानी की मार से अब तक 240 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं। दो मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं। इस त्रासदी पर अब न्यायपालिका ने सख्त तेवर दिखाए हैं। सिविल जज कोर्ट ने बार एसोसिएशन की याचिका स्वीकार करते हुए लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है।
अदालत ने सोमवार को सीपीसी की धारा 80(2) के तहत सुनवाई की मंजूरी दे दी है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नवनीत वशिष्ठ के नेतृत्व में वकीलों ने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने खुले में कचरा फेंकने और सीवरेज बहाने को गंभीर अपराध बताया। वकीलों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो और भारी जुर्माना लगाया जाए।
इस कानूनी कार्रवाई ने प्रशासन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि साफ पानी मांगना उनका बुनियादी हक है। प्रशासन की अनदेखी ने पूरे क्षेत्र को महामारी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब अदालत ही उनकी आखिरी उम्मीद बची है।
इन 12 बड़े अधिकारियों पर गिरेगी गाज, कोर्ट ने थमाया नोटिस
अदालत ने इस मामले में 12 प्रमुख प्रतिवादियों को जवाबदेह बनाया है। इसमें जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव और मंडी के डीसी शामिल हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और बीडीओ को भी कोर्ट ने कटघरे में खड़ा किया है। गोहर, बासा, चैलचौक और चच्योट जैसी पंचायतों के सचिवों को भी नोटिस जारी हुए हैं। इन सभी को अब अदालत में अपनी सफाई देनी होगी।
सुनवाई के दौरान जलशक्ति विभाग के एक्सईएन और बीएमओ खुद कोर्ट में मौजूद रहे। जज साहब ने सभी संबंधित अधिकारियों से दो दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सबसे कड़ा निर्देश पंचायत सचिवों के लिए जारी हुआ है। अब उन्हें हर पेशी पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा। कोर्ट की इस सख्ती से अफसरों की नींद उड़ गई है।
गोहर की जनता अब 25 मार्च की अगली सुनवाई का इंतजार कर रही है। दूषित पानी और गंदगी के ढेर ने इलाके का जीना मुहाल कर दिया है। लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के हंटर के बाद अब सीवर सिस्टम पर काम शुरू होगा। प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटने का समय आ गया है। पीलिया के इस कहर से अब गोहर को मुक्ति मिलने की आस जगी है।


