क्या आप भी विदेश जाने की प्लानिंग कर रहे हैं? पीएम मोदी की इस अपील ने बढ़ा दी है करोड़ों भारतीयों की धड़कन

India Business News: भारतीयों में विदेश यात्रा का शौक अब एक बड़े आर्थिक संकट की आहट दे रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 3.17 करोड़ भारतीयों ने विदेश की सैर की है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से एक साल तक विदेश यात्रा टालने की अपील की है। सरकार चाहती है कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जाए और घरेलू पर्यटन को मजबूती मिले।

विदेश यात्राओं का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की सेहत पर पड़ता है। जब भारतीय नागरिक बाहर जाकर डॉलर खर्च करते हैं, तो रुपया कमजोर होने लगता है। पीएम मोदी ने वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला दिया है। उन्होंने फिजूलखर्ची रोकने को एक तरह की देशभक्ति करार दिया है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी काफी कम हो जाएगा।

भारतीयों ने विदेश में उड़ाए खरबों रुपये

आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों ने एक साल में तकरीबन 2.65 लाख करोड़ रुपये विदेश में खर्च किए। यह राशि कई छोटे अफ्रीकी देशों की कुल जीडीपी के बराबर है। पिछले तीन दशकों में विदेश जाने वालों की संख्या में सालाना 8.7% की ग्रोथ देखी गई है। 1991 में जहां केवल 19 लाख लोग बाहर गए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या 3 करोड़ पार कर गई। यह बढ़ता ट्रेंड अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।

रिजर्व बैंक की एलआरएस (LRS) स्कीम के तहत लोग विदेश में पैसा भेजते हैं। 2012 में इस स्कीम का केवल 1.5% हिस्सा विदेश यात्रा पर खर्च होता था। अब यह बढ़कर 54% हो चुका है, यानी हर 100 रुपये में से 54 रुपये सिर्फ घूमने पर खर्च हो रहे हैं। फिक्की का अनुमान है कि 2034 तक भारत का आउटबाउंड टूरिज्म मार्केट 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इसमें पहली बार विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा होगी।

छोटे शहरों के युवाओं में सबसे ज्यादा क्रेज

हैरानी की बात यह है कि अब केवल बड़े शहरों के लोग ही विदेश नहीं जा रहे हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों से जाने वालों की हिस्सेदारी करीब 92% तक पहुंच गई है। गया, इंदौर और सूरत जैसे शहरों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की मांग बढ़ी है। दुबई जैसे देशों ने इस मौके को भुनाते हुए 20 भारतीय शहरों से सीधी उड़ानें शुरू की हैं। विदेश जाने वालों में 25 से 44 साल के युवाओं की संख्या आधी से अधिक है।

भारतीयों की पसंदीदा जगहों में यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा थाईलैंड, वियतनाम और बाली जैसे बजट फ्रेंडली देश भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। करीब 42% लोग सिर्फ छुट्टियां मनाने बाहर जाते हैं। प्रधानमंत्री की अपील का मकसद इसी पैसे को भारत के भीतर खर्च करवाना है। अगर यह पैसा देश के होटलों और एयरलाइंस को मिलेगा, तो भारत की पर्यटन व्यवस्था बहुत अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन जाएगी।

स्वदेशी पर्यटन से चमकेगी देश की अर्थव्यवस्था

अगर भारतीय नागरिक विदेश के बजाय देश में घूमेंगे, तो करोड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। वर्तमान में पर्यटन क्षेत्र करीब 4.3 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान कर रहा है। 2034 तक यह संख्या बढ़कर 6.3 करोड़ हो सकती है। थाईलैंड या यूरोप में खर्च होने वाला पैसा यदि भारत के पर्यटन स्थलों पर लगेगा, तो जीडीपी में बड़ा उछाल आएगा। इससे न केवल डॉलर की मांग घटेगी, बल्कि भारतीय रुपया भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत होगा।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories