Himachal News: हिमाचल प्रदेश में साफ पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। दूषित जल के कारण राज्य में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। साल 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में 34 बार संक्रामक बीमारियों के प्रकोप दर्ज किए गए हैं। इन बीमारियों ने 3,937 लोगों को अपनी चपेट में लिया है। इस गंभीर संकट में दो मरीजों की मौत भी हुई है। आईजीएमसी शिमला के विशेषज्ञों के ताजा शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।
2024 में टूटा संक्रामक बीमारियों का कहर
आईजीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञों ने यह महत्वपूर्ण शोध किया है। डॉ. अमित सचदेवा की टीम ने ये डराने वाले आंकड़े जुटाए हैं। अध्ययन में साल 2024 को संक्रामक रोगों के लिए सबसे घातक माना गया है। इस दौरान अकेले 2024 में बीमारियों के 17 बड़े प्रकोप सामने आए थे। इसी वर्ष संक्रमण की वजह से दो गंभीर मरीजों ने जान गंवाई थी। पहाड़ी क्षेत्रों में दूषित पेयजल और स्वच्छता की भारी कमी को इन सभी बीमारियों का मुख्य कारण बताया गया है।
डायरिया और हेपेटाइटिस ने मचाई तबाही
पिछले पांच सालों में डायरिया सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारी रही। शोध के अनुसार इस रोग के कुल 2,796 मरीज दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा सभी मरीजों का 71 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बाद हेपेटाइटिस-ए ने लोगों की सेहत को भारी नुकसान पहुंचाया। राज्य में हेपेटाइटिस-ए के 702 नए मामले मिले हैं। डेंगू के मरीजों की कुल संख्या 9.6 प्रतिशत रही है। पीलिया और एचएफएमडी के मामले अन्य बीमारियों के मुकाबले प्रदेश में काफी कम पाए गए हैं।
मंडी और सोलन में दिखा सबसे ज्यादा असर
बीमारियों का सर्वाधिक असर मंडी, सोलन और हमीरपुर जिलों में देखने को मिला। मंडी जिले में सबसे ज्यादा 11 बार संक्रमण का प्रकोप सामने आया। सोलन में प्रकोप की संख्या कम थी लेकिन मरीजों की संख्या अत्यधिक दर्ज हुई। मौसम के लिहाज से मानसून और पोस्ट-मानसून सीजन सबसे ज्यादा खतरनाक रहे। जून से नवंबर के बीच संक्रमण के 60 प्रतिशत से अधिक मामले आए। खास तौर पर अक्टूबर और नवंबर महीने में संक्रामक बीमारियां अपने सबसे चरम स्तर पर फैली थीं।


