Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चल रही चर्चा का अंत भारी हंगामे के साथ हुआ। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल भाजपा ने सदन से वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकार पर प्रदेश को ‘श्रीलंका’ जैसी आर्थिक बदहाली में धकेलने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार संसाधनों को लुटाने के बजाय वित्तीय अनुशासन लागू करने पर ध्यान दे रही है।
सदन में सरकार बनाम विपक्ष: आरोपों की बौछार
बजट सत्र के आखिरी दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के समय बजट में केवल हवाई आंकड़े दिखाए जाते थे। उन्होंने दावा किया कि पूर्व सरकार को केंद्र से 70 हजार करोड़ रुपये मिले, फिर भी प्रदेश पर 76 हजार करोड़ का कर्ज छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने हिमकेयर योजना और रोगी कल्याण समिति के खर्चों में गड़बड़ी की विजिलेंस जांच कराने का भी ऐलान किया। दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और अन्य भाजपा विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विधायक निधि और कानून-व्यवस्था पर तकरार
भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने विधायक निधि में कटौती का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसी निधि से गांवों के छोटे विकास कार्य पूरे होते हैं। सत्ती ने राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार और भू-माफिया की सक्रियता पर भी चिंता जताई। वहीं, निर्दलीय विधायक अनिल शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार उन होर्डिंग्स को हटा दे जिनमें 5 लाख नौकरियों का वादा किया गया था। उन्होंने बजट के घटते आकार और आय के संसाधनों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।
आरडीजी को लेकर केंद्र पर निशाना
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक अनुराधा राणा ने केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद करने को प्रदेश के साथ भेदभाव बताया। अनुराधा राणा ने कहा कि आपदा राहत के 1500 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं। हालांकि, विपक्ष ने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया। पूरे दिन चले इस हंगामेदार सत्र के दौरान कई बार विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और कुछ विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।


