हिमाचल विधानसभा में हाईवोल्टेज ड्रामा: जब SP को FIR में लगे 10 घंटे, सुक्खू बोले- ‘विधायक भी हुआ तो नहीं छोड़ूंगा’

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में अपराध पूरी तरह नियंत्रण में है। पूर्व की जयराम सरकार के मुकाबले कांग्रेस राज में आपराधिक मामलों में छह प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, विपक्ष ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

आंकड़ों की गवाही: सुक्खू सरकार में घटे अपराध

मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा में विपक्ष के कटौती प्रस्ताव का करारा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि भ्रष्टाचार में अगर कोई विधायक भी शामिल मिला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। सुक्खू ने रिज मैदान पर ली गई अपनी शपथ का जिक्र किया। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि पूर्व भाजपा सरकार के पहले तीन साल में 60,148 आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसके विपरीत मौजूदा सरकार के तीन साल में यह आंकड़ा घटकर 56,706 रह गया है। यह 1440 मुकदमों की स्पष्ट कमी दिखाता है। पुलिस शाम सात बजे के बाद खनन माफिया पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

विधायक आशीष शर्मा के आरोपों पर सदन में टकराव

सदन का माहौल तब गरमा गया जब हमीरपुर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार पर राजनीतिक द्वेष के चलते पुलिस से प्रताड़ित करवाने का आरोप लगाया। इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में लंबित है, इसलिए सदन में इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री ने विधायक पर तंज कसते हुए कहा कि अदालत में भी तो उनकी जमानत रद्द हुई है।

स्पीकर का नियम 310 और विपक्ष का हंगामा

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी मुख्यमंत्री का साथ दिया। उन्होंने नियम 310 का हवाला देकर अदालत में लंबित मामलों पर चर्चा से साफ इनकार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और रणधीर शर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर हर मामले को अदालत का बताकर रोक दिया जाएगा, तो सदन में चर्चा किस मुद्दे पर होगी। विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। इसी भारी शोरगुल के बीच विपक्ष का कटौती प्रस्ताव गिर गया।

जब एसपी को ही एफआईआर दर्ज कराने में लगे 10 घंटे

भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल ने बिलासपुर का एक बेहद चौंकाने वाला मामला उठाया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के एसपी के साथ मारपीट हुई। हैरानी की बात यह है कि खुद एक एसपी को अपनी एफआईआर दर्ज करवाने में 10 घंटे का लंबा समय लग गया। जमवाल ने सवाल दागा कि ऐसे लचर सिस्टम में आम आदमी का क्या होगा? उन्होंने बिलासपुर गोलीकांड और पूर्व डीजीपी को छुट्टी पर भेजे जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।

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