दिल्ली बीजेपी के नए ‘कैप्टन’ पर सस्पेंस: वीरेंद्र सचदेवा की कुर्सी बचेगी या कुलजीत चहल मारेंगे बाजी?

Delhi News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरणों के बीच दिल्ली बीजेपी में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए पार्टी के भीतर लॉबिंग और चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल पूरा होने को है, जिससे नए नामों पर विचार हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

वीरेंद्र सचदेवा को दोबारा मौका मिलने की उम्मीद

पार्टी के भीतर एक बड़ा गुट वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक और चमत्कारी जीत है। सचदेवा के कुशल नेतृत्व में पार्टी ने 27 साल का लंबा सूखा खत्म करते हुए सत्ता में वापसी की है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनकी रणनीति ने दिल्ली के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदलकर रख दिया और पार्टी को शिखर पर पहुंचाया।

ऐतिहासिक जीत और कार्यकाल के नियम

वीरेंद्र सचदेवा के कार्यकाल के दौरान बीजेपी ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर कब्जा किया था। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने दिल्ली की सभी सातों सीटें जीती थीं। हालांकि, बीजेपी के संविधान के अनुसार किसी भी प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है। सचदेवा को पद पर तीन साल पूरे हो चुके हैं। अब हाईकमान को तय करना है कि वे नियमों में ढील देकर उन्हें दोबारा मौका देते हैं या नहीं।

अध्यक्ष पद की रेस में कुलजीत चहल का नाम

एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत चहल को इस पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। चहल जाट समुदाय से आते हैं और नमो ऐप के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व, विशेषकर प्रधानमंत्री कार्यालय के काफी करीब माना जाता है। चहल की सक्रियता और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें इस रेस में आगे रखती है। पार्टी उन पर दांव लगाकर जाट वोट बैंक को साध सकती है।

हर्ष मल्होत्रा और जय प्रकाश की दावेदारी

केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा का नाम भी अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है। मल्होत्रा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता है। उनके अलावा पूर्व मेयर जय प्रकाश के नाम पर भी मंथन चल रहा है। जय प्रकाश गुर्जर समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी नेतृत्व अब यह तय करेगा कि दिल्ली की सामाजिक और जातीय संरचना के हिसाब से कौन सा चेहरा सबसे फिट बैठता है।

बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद बड़ा फैसला

दिल्ली बीजेपी के भविष्य पर अंतिम मुहर पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद ही लगेगी। बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जिसके नतीजे 4 मई को आएंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व फिलहाल बंगाल पर केंद्रित है। वहां से फ्री होते ही दिल्ली के नए अध्यक्ष के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। तब तक दिल्ली की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म रहेगा।

जातीय समीकरण और नेतृत्व की चुनौती

बीजेपी के लिए दिल्ली का अगला अध्यक्ष चुनना किसी चुनौती से कम नहीं है। दिल्ली में पंजाबी, जाट, वैश्य और गुर्जर समुदायों का बड़ा प्रभाव है। सचदेवा और मल्होत्रा पंजाबी समुदाय से हैं, जबकि चहल जाट और जय प्रकाश गुर्जर नेता हैं। नेतृत्व को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके। आगामी निगम चुनावों को देखते हुए भी पार्टी किसी भी तरह की गुटबाजी से बचना चाहती है।

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