सरकारी दफ्तरों से हटेगा करोड़ों का कबाड़! सुक्खू सरकार लाएगी नई पॉलिसी, विधानसभा में खुले पिछली सरकार के राज

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में सालों से करोड़ों रुपये का कबाड़ धूल फांक रहा है। अब राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार इस कबाड़ को हटाने के लिए नई ‘स्क्रैप पॉलिसी’ लाने जा रही है। मंगलवार को विधानसभा के प्रश्नकाल में मुख्यमंत्री ने यह बड़ा ऐलान किया है। इसके साथ ही सदन में जल जीवन मिशन के फंड से बने रेस्ट हाउस का मुद्दा भी गरमा गया।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल का सीधा जवाब दिया। उन्होंने बताया कि इस अहम मुद्दे पर अगली कैबिनेट बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। सरकार कबाड़ के निपटारे के लिए स्पष्ट नियम और एक पारदर्शी नीति बनाएगी। इससे हर साल सरकारी दफ्तरों से व्यवस्थित तरीके से कबाड़ को हटाया जा सकेगा।

सभी विभागों के लिए बनेंगे एक समान नियम, पर्यावरण का रखा जाएगा ध्यान

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कबाड़ का यह मुद्दा किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है। राज्य के सभी विभागों के लिए एक समान और सख्त नियम बनाए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग भी अपने कबाड़ को ठिकाने लगाने के लिए अलग से रणनीति तैयार करेगा।

अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के सख्त निर्देश दिए जाएंगे। नीति बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। वहीं, दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में जल जीवन मिशन का बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के पास राज्य के 1227 करोड़ रुपये अभी भी फंसे हुए हैं।

जल जीवन मिशन का रुका पैसा, पिछली सरकार पर उठे गंभीर सवाल

उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष से इस रुके हुए फंड को जल्द जारी करवाने में मदद की अपील की। उन्होंने भाजपा विधायक बलबीर सिंह वर्मा के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया। वर्मा ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के विधायकों के क्षेत्रों में पैसा खर्च नहीं हो रहा है। अग्निहोत्री ने साफ किया कि जल जीवन मिशन का पैसा योजना के आधार पर ही जारी होता है।

इसमें सत्ता पक्ष या विपक्ष के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव बिल्कुल नहीं होता है। विधायक रणधीर शर्मा ने विपक्ष के क्षेत्रों की योजनाओं की डीपीआर नाबार्ड भेजने का सुझाव दिया। इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल का एक बड़ा राज खोला। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने जल जीवन मिशन के 28 करोड़ रुपये से रेस्ट हाउस बना दिए थे।

केंद्र ने मांगा रेस्ट हाउस का हिसाब, अब मिशन के फंड से नहीं बनेंगे भवन

अब केंद्र सरकार इन रेस्ट हाउस के निर्माण पर कड़े सवाल उठा रही है। केंद्र ने राज्य सरकार से मिशन की वह भारी-भरकम राशि वापस मांग ली है। उपमुख्यमंत्री ने सदन में साफ किया कि भविष्य में इस फंड से कोई रेस्ट हाउस नहीं बनेगा। जहां जरूरत होगी, वहां अन्य सरकारी स्रोतों से ही रेस्ट हाउस का निर्माण किया जाएगा।

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