Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शनिवार को पेश हुई लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट ने गृह और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सदन में रखी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये की लंबित वसूली का अंबार लगा है। पीएसी के सभापति अनिल शर्मा द्वारा पेश की गई यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे वर्षों से ऑडिट आपत्तियां फाइलों में दबी हुई हैं। यदि इन कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो प्रदेश की आर्थिक सेहत और प्रशासनिक साख दोनों पर गहरा संकट मंडरा सकता है।
एक दशक बाद भी ऑडिट आपत्तियां जस की तस
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दस साल से अधिक समय बीतने के बाद भी कई ऑडिट आपत्तियों का निपटारा नहीं हुआ है। इसे सीधे तौर पर वित्तीय प्रबंधन में घोर लापरवाही माना जा रहा है। समिति ने सख्त लहजे में कहा है कि नियमों का पालन न करना और जवाबदेही से बचना प्रशासनिक विफलता का संकेत है। यह रिपोर्ट मुख्य रूप से वर्ष 2008-10 की पुरानी शिकायतों पर आधारित है, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऑडिट रिकॉर्ड्स बताते हैं कि सरकारी तंत्र वित्तीय अनुशासन को लेकर कितना उदासीन रहा है।
रेलवे और एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास फंसा जनता का पैसा
सबसे चौंकाने वाला तथ्य सरकारी बकाये की वसूली को लेकर सामने आया है। रेलवे, एयरपोर्ट अथॉरिटी और कई बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं ने वर्षों से सरकार का पैसा दबा रखा है। एक मामले में तो 2.32 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है। प्रदेश आज जिस आर्थिक दबाव और मितव्ययिता के दौर से गुजर रहा है, वहां इतनी बड़ी रकम का फंसा होना चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार, इन एजेंसियों से अब तक केवल नाममात्र की ही वसूली हो पाई है, जबकि शेष राशि ठंडे बस्ते में है।
वेतन में अधिक भुगतान और बजट का गलत अनुमान
ऑडिट जांच में यह भी पाया गया कि बजट अनुमान और वास्तविक प्राप्तियों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। कई विभागों ने अग्रिम राशि तो ले ली, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया। इसके अलावा, वेतन और भत्तों के अधिक भुगतान जैसे मामले भी सामने आए हैं। सुरक्षा सेवाओं के लिए तैनात पुलिस बल के बदले मिलने वाला राजस्व भी लंबित है। इन सभी गड़बड़ियों पर लोक लेखा समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों से तुरंत जवाब तलब किया है और बकाया राशि वसूलने के कड़े निर्देश दिए हैं।


