Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शनिवार को भारी हंगामा देखने को मिला। केंद्र सरकार से मिले 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक के फंड पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में ज्यादा पैसा खर्च करने का गंभीर आरोप लगाया। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र से मिले एक-एक पैसे का पूरा हिसाब सदन के पटल पर रख दिया।
केंद्र से मिले 11,735 करोड़, सीएम ने दिया हर मद का ब्योरा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने सदन को बताया कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार से राज्य को कुल 11,735 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से बताया कि राजस्व घाटा अनुदान में 2,714 करोड़ और राज्य आपदा राहत फंड में 398 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत 4,062 करोड़ और स्थानीय निकायों के लिए 734 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। सीएम ने साफ कहा कि पूरे प्रदेश के विकास के लिए उनका दिल हमेशा खुला है।
नाबार्ड की लिमिट बढ़ी, विधायकों को मिली बड़ी राहत
भाजपा विधायक विनोद कुमार, रणधीर शर्मा और सुधीर शर्मा ने नाबार्ड योजनाओं को लेकर सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री ने इसका जवाब देते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि विधायकों के लिए नाबार्ड की लिमिट 200 करोड़ से बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये कर दी गई है। भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने अपनी 70 करोड़ की लिमिट बचने और एक सड़क को मंजूरी न मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर सीएम सुक्खू ने उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव देने को कहा और मंजूरी का भरोसा दिया।
जयराम ठाकुर का वार, विकास में भेदभाव का लगाया आरोप
सदन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार केंद्र से मिले पैसे को केवल कांग्रेस विधायकों वाले क्षेत्रों में लुटा रही है। जयराम ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल को जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद दे रही है। फिर भी राज्य सरकार हमेशा केंद्र से सहयोग न मिलने का झूठा रोना रोती है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि क्या आगे इस भेदभाव को खत्म किया जाएगा?
भाजपा क्षेत्रों में भी दिया गया बजट: मुख्यमंत्री
जयराम ठाकुर के गंभीर आरोपों पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र से मिलने वाली राशि राज्य का हक है। यह पैसा योजनागत और करों के हिस्से के रूप में मिलता है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में कोई भेदभाव नहीं हो रहा है। भाजपा विधायकों के चुनाव क्षेत्रों में भी जरूरत के अनुसार पूरा बजट दिया गया है। राज्य सरकार पूरे हिमाचल के समान और संतुलित विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


