हिमाचल के स्पा सेंटरों में पर्दे के पीछे क्या हो रहा है? सरकार के इस सख्त कदम से मच गया हड़कंप

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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में चल रहे स्पा सेंटरों की अब खैर नहीं है। राज्य सरकार इन केंद्रों पर नकेल कसने जा रही है। इसके लिए एक नई नीति और मानक संचालन प्रक्रिया बनाई जाएगी। विधानसभा में यह अहम मुद्दा गूंजा है। इसके साथ ही सरकार ने रेस्ट हाउस की ऑनलाइन बुकिंग से कमाई शुरू कर दी है। वहीं नदियों के तटीकरण के लिए भी केंद्र से मदद मांगी जा रही है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा में विधायक राजेश्वर गौड़ के सवाल का जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि स्पा सेंटर अभी सिर्फ लेबर कानून के तहत पंजीकृत हैं। नियम टूटने पर इसी कानून के तहत कार्रवाई होती है। अब सरकार इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने वाली है।

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सरकार इन स्पा सेंटरों को स्वास्थ्य और आयुष विभाग के दायरे में लाएगी। दोनों विभाग मिलकर एक सख्त नीति तैयार करेंगे। इससे स्पा सेंटरों में होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। इसके लिए जल्द ही एक अहम बैठक होने वाली है। मंत्री ने जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोई भी गलत गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।

ऑनलाइन बुकिंग से खजाना भरने की कवायद

विधानसभा सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल शक्ति विभाग ने 81 भवनों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी है। इनमें रेस्ट हाउस और किसान भवन शामिल हैं। इस साल जनवरी से शुरू हुई इस सुविधा से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। विभाग अब तक करीब पांच लाख रुपये की कमाई कर चुका है।

उपमुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के काम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये के रेस्ट हाउस बनाए गए थे। इस काम में करीब सत्ताईस करोड़ रुपये खर्च हुए थे। अब वर्तमान राज्य सरकार इस रुकी हुई राशि को हासिल करना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार से लगातार बातचीत की जा रही है।

प्रदेश में नदियों के चैनलाइजेशन का मुद्दा भी काफी गंभीर है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार का रुख बदलना जरूरी है। छौंछ खड्ड के तटीकरण के लिए साल 2019 में छब्बीस करोड़ मंजूर हुए थे। लेकिन केंद्र से यह पैसा कभी जारी ही नहीं हुआ। देरी के कारण अब इस परियोजना की लागत तीन सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

केंद्र के सहयोग पर टिकी हिमाचल की उम्मीदें

राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में ब्यास नदी और चक्की खड्ड का मामला भी उठाया गया। यहां बाढ़ से बचाव के लिए सुरक्षा परियोजनाएं बनाने पर विचार चल रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि बिना केंद्र की मदद के यह काम संभव नहीं है। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए केंद्रीय सहयोग बहुत जरूरी है।

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